आज का बड़ा सवाल – क्या डिजिटल इंडिया का अगला कदम 'डिजिटल वोटिंग' होगा?
21वीं सदी का भारत डिजिटल क्रांति के दौर से गुजर रहा है। UPI से लेकर डिजिलॉकर तक, हर काम मोबाइल पर हो रहा है। ऐसे में एक बड़ी मांग जोर पकड़ रही है – चुनाव में भी वोटिंग को ऑनलाइन किया जाए।
लंबी कतारों में खड़े वोटर, बुजुर्ग, दिव्यांग, गर्मी में परेशान लोग..
. हर चुनाव में हम देखते हैं – घंटों लंबी लाइनें, धूप-बारिश में बुजुर्गों और दिव्यांगों की परेशानी, प्रवासी मजदूरों का वोट से वंचित रह जाना। 2024 लोकसभा चुनाव में ही करीब 33% वोटर ऐसे थे जो वोट डालने नहीं पहुंच पाए।
* "जब बैंकिंग, इनकम टैक्स, पासपोर्ट सब कुछ ऑनलाइन सुरक्षित हो सकता है, तो वोटिंग क्यों नहीं? ब्लॉकचेन, OTP, फेस रिकग्निशन और आधार लिंक्ड सिस्टम से इसे पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।"
* दुनिया के कई देश जैसे एस्टोनिया में 2005 से ऑनलाइन वोटिंग हो रही है। भारत में भी चुनाव आयोग ने रिमोट वोटिंग मशीन RVM पर ट्रायल शुरू किया था। लेकिन 'घर बैठे मोबाइल से वोट' का सपना अभी दूर है।
*[ "फायदे क्या होंगे?"]*..
1. *वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा:* 70% से बढ़कर 90% तक जा सकता है
2. *खर्च कम होगा:* EVM, सुरक्षा बल, पोलिंग बूथ का खर्च बचेगा
3. *प्रवासियों को राहत:* दिल्ली में बैठा बिहार का मजदूर भी अपने गांव का वोट डाल सकेगा
4. *समय की बचत:* पूरा दिन लाइन में नहीं लगना पड़ेगा
* "हम UPI से 2 सेकंड में पेमेंट कर देते हैं, तो वोट क्यों नहीं? सरकार को डिजिटल दौर को थोड़ा और हवा देनी चाहिए।"
लेकिन सवाल सुरक्षा का भी है। हैकिंग, फर्जी वोटिंग, वोट की गोपनीयता – इन चुनौतियों से कैसे निपटा जाएगा?
* सरकार और चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है – तकनीक को इतना मजबूत बनाना कि एक भी वोट के साथ छेड़छाड़ न हो। बायोमेट्रिक, डबल ऑथेंटिकेशन, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसे उपायों पर चर्चा चल रही है।
'डिजिटल इंडिया' का नारा तभी पूरा होगा जब 'डिजिटल वोटर' को भी घर बैठे अधिकार मिले। अब गेंद सरकार और चुनाव आयोग के पाले में है।
आप क्या सोचते हैं – क्या भारत ऑनलाइन वोटिंग के लिए तैयार है? हमें कमेंट में जरूर बताएं।

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