संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH न्यूज़ 11 GROUP:-गयाजी 02 नवम्बर 2026
समाज के माथे पर कलंक बन चुके बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकने और बच्चों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी सुनिश्चित करने के वास्ते गया जिला पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में सोमवार को खिजरसराय प्रखंड कार्यालय सभागार में महिला विकास निगम एवं कवच परियोजना (Centre DIRECT) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण शिविर में नीमचक बथानी अनुमंडल के अंतर्गत आने वाले खिजरसराय, अतरी, मोहड़ा और नीमचक बथानी प्रखंडों की सभी आंगनवाड़ी पर्यवेक्षिकाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
बाल संरक्षण और रोकथाम पर जोर कार्यक्रम का संचालन महिला विकास निगम की जिला परियोजना प्रबंधक जयवंती सिन्हा, जेंडर स्पेशलिस्ट (WCDC) विशाल कुमार वर्मा, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) मोना कुमारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पूजा गहलौत के संयुक्त मार्गदर्शन में हुआ। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने बाल संरक्षण, बच्चों के कानूनी अधिकारों, जोखिम में फंसे बच्चों की पहचान और बाल विवाह से होने वाले भयानक शारीरिक व मानसिक दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही, समाज की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनवाड़ी सेविकाओं और पर्यवेक्षिकाओं को इस बुराइ को रोकने में उनकी अहम भूमिका समझाई गई। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर धरातल पर बाल विवाह की घटनाओं को रोकने के पुख्ता उपायों पर भी गहन चर्चा हुई।
गांव-गांव पहुंचेगा जागरूकता का संदेश प्रशिक्षण कार्यक्रम के उपरांत बाल विवाह के विरुद्ध जन-आंदोलन को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया। प्रखंड विकास पदाधिकारी पूजा गहलौत, सीडीपीओ मोना कुमारी, जिला परियोजना प्रबंधक जयवंती सिन्हा और डब्ल्यूसीडीसी (WCDC) के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रथों को रवाना किया।ये जागरूकता रथ खिजरसराय, नीमचक बथानी, अतरी और मोहड़ा प्रखंड की प्रत्येक पंचायत का सघन दौरा करेंगे। रथ के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में लोगों को बाल विवाह से जुड़े कड़े कानूनी प्रावधानों, इसके दुष्परिणामों तथा बेटियों की उच्च शिक्षा एवं उनके सुरक्षित भविष्य के महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास निगम के अंतर्गत संचालित 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान और कवच परियोजना का यह साझा प्रयास ग्रामीण अंचलों में सामाजिक चेतना जगाने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगा।

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