महराजगंज,धनतेरस पांच दिवसीय दीपोत्सव का शुभारंभ धनतेरस यानी धनत्रयोदशी के पावन पर्व से होता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। यही वजह है कि धनतेरस पर धन-संपत्ति के साथ निरोगी जीवन और दीर्घायु की भी कामना की जाती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव का वास होता है। वहीं, धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तन और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में बरकत और खुशहाली लाती हैं।
धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीप जलाने की भी परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक विश्वास है कि यम दीपदान करने से परिवार पर अकाल मृत्यु का भय कम होता है और परिजनों की लंबी आयु की कामना पूर्ण होती है।
इस पर्व पर घरों की साफ-सफाई और सजावट का भी विशेष महत्व है। लोग घर के कोने-कोने की सफाई कर दीप जलाते हैं। झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक मानकर उसकी खरीदारी और पूजा करने की भी परंपरा प्रचलित है।
धनतेरस का पर्व केवल धन-संपत्ति अर्जित करने का संदेश नहीं देता, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, स्वच्छता, सकारात्मकता और परिवार की खुशहाली का भी प्रतीक है। यही कारण है कि दीपावली के स्वागत में धनतेरस से ही घर-आंगन में उत्सव और उल्लास का माहौल छाने लगता है।
प्रभारी महराजगंज
कैलाश सिंह.

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