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राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक वादों के निष्पादन एवं पक्षकारों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने में थानाध्यक्षों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण : अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश.






मिथिलेश कुमार पाण्डेय व्यूरो चीफ औरंगाबाद।



औरंगाबाद। आज दिनांक 04/11/2026 आगामी 12 दिसंबर, 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभागार में थानाध्यक्षों के साथ बैठक को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने तथा अधिकाधिक मामलों का आपसी सुलह एवं समझौते के आधार पर निष्पादन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सभागार में जिले के सभी थानाध्यक्षों  के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विश्व विभूति गुप्ता ने की। बैठक में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम उमेश प्रसाद, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाल बिहारी पासवान तथा अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-प्राधिकार के प्रभारी सचिव संदीप कुमार सिंह उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक सुलहनीय एवं समझौता योग्य मामलों का निष्पादन कराने के साथ-साथ संबंधित पक्षकारों तक न्यायालय द्वारा निर्गत नोटिस की समयबद्ध तामिला सुनिश्चित करना तथा उन्हें निर्धारित तिथि को न्यायालय परिसर तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना है 

         


इस अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विश्व विभूति गुप्ता ने सभी थानाध्यक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता में पुलिस प्रशासन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा विभिन्न न्यायालयों में लंबित सुलहनीय वादों की सूची थानावार तैयार कर संबंधित थानाध्यक्षों को उपलब्ध कराई जा रही है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षकारों तक नोटिस की त्वरित एवं प्रभावी तामिला कराना तथा उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व से अवगत कराकर निर्धारित तिथि को उपस्थित होने के लिए प्रेरित करना संबंधित थानाध्यक्षों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिया कि नोटिस की तामिला केवल औपचारिकता के रूप में नहीं की जाए, बल्कि प्रत्येक पक्षकार को यह समझाया जाए कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से वे अपने विवादों का निस्तारण सरल, सुलभ, त्वरित एवं आपसी सहमति के आधार पर करा सकते हैं। इससे न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि पक्षकारों के बीच वर्षों से चले आ रहे विवादों का भी स्थायी समाधान संभव हो सकेगा। उन्होंने सभी थानाध्यक्षों से अपील की कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में गणमान्य व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों का सहयोग लेकर राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाएं। आम लोगों को समझाएं कि छोटे-छोटे विवादों को आपसी सहमति से समाप्त कर समाज में प्रेम, सौहार्द,भाईचारा एवं शांति का वातावरण स्थापित किया जा सकता है। विवादों के समाधान में पुलिस प्रशासन की सक्रिय भागीदारी एक विवादमुक्त एवं सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

          


 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम उमेश प्रसाद ने अपने संबोधन में थानाध्यक्षों को निर्देशित किया कि नोटिस की तामिला के दौरान पक्षकारों का पूरा नाम, मोबाइल नंबर एवं अन्य आवश्यक संपर्क विवरण अवश्य अंकित कराया जाए, ताकि संबंधित न्यायालय एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा भी पक्षकारों से संपर्क स्थापित कर उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में पक्षकारों को समझाने-बुझाने अथवा काउंसलिंग की आवश्यकता हो, तो उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकार अथवा संबंधित न्यायालय में भेजा जाए, ताकि आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन के माध्यम से विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावना को बढ़ाया जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी मामले में सूचक अथवा संबंधित पक्षकार थाना क्षेत्र से बाहर निवास कर रहा हो, तो संबंधित थाना प्रभारी अपने स्तर से दूसरे संबंधित थाने से संपर्क स्थापित कर नोटिस की तामिला एवं सूचना पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। ऐसी स्थिति में इसकी सूचना संबंधित न्यायालय अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकार को भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी पक्षकार की अनुपस्थिति के कारण मामले के निष्पादन में बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को यह भी कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों के साथ बैठक कर राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य एवं लाभों से उन्हें अवगत कराएं। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से गांवों, पंचायतों एवं शहरी मोहल्लों में व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अवसर का लाभ उठा सकें और आपसी विवादों को समाप्त कर सकें। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाल बिहारी पासवान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के निष्पादन के लिए संबंधित पक्षकारों तक नोटिस पहुंचाना और उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित कराना अत्यंत आवश्यक है। इस महत्वपूर्ण कार्य में थाना प्रभारियों की भूमिका सराहनीय एवं निर्णायक है। उन्होंने सभी थानाध्यक्षों से अपेक्षा की कि वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी गंभीरता, तत्परता एवं सक्रियता के साथ करें, ताकि अधिक से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन हो सके। वहीं अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-प्राधिकार के प्रभारी सचिव श्री संदीप कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विगत राष्ट्रीय लोक अदालत में पुलिस प्रशासन की भूमिका काफी सराहनीय एवं प्रशंसनीय रही थी। थानाध्यक्षों के सक्रिय सहयोग एवं समन्वय के कारण बड़ी संख्या में मामलों के निष्पादन में सफलता प्राप्त हुई थी। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा कई थानाध्यक्षों  को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया था।

उन्होंने कहा कि पूर्व की सफलता से सभी की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। आगामी 12 दिसंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में पिछले प्रदर्शन से भी बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी थानाध्यक्षों को समन्वित प्रयास करना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पुलिस प्रशासन के सक्रिय सहयोग, न्यायिक पदाधिकारियों के मार्गदर्शन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समन्वित प्रयास से इस बार भी अधिकाधिक मामलों का निष्पादन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

   

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत केवल लंबित मामलों के निष्पादन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों को सुलभ, त्वरित एवं कम खर्च में न्याय प्राप्त करने का एक प्रभावी अवसर भी प्रदान करती है। इसके माध्यम से पक्षकार आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं तथा अनावश्यक मुकदमेबाजी, समय और धन की बर्बादी से बच सकते हैं। अंत में सभी थानाध्यक्षों  से अपेक्षा की गई कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को एक सामूहिक जिम्मेदारी मानते हुए नोटिस की शत-प्रतिशत तामिला, पक्षकारों से प्रभावी संपर्क, व्यापक जन-जागरूकता एवं न्यायालय के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना सुनिश्चित करेंगे, और अपने अपने थाना क्षेत्र से कम से कम 25 वादों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित करे ताकि आगामी 12 दिसंबर 2026 की राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल एवं ऐतिहासिक बनाया जा सके।

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