संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH NEWS 11 GROUP :-गयाजी बिहार पूर्व मध्य रेलवे के पंडित दीनदयाल उपाध्याय डीडीयू मंडल अंतर्गत गया रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेल थाना (जीआरपी) की संयुक्त टीम ने 'ऑपरेशन यात्री सुरक्षा' अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने गया रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म संख्या 01 (सी) पर कार्रवाई करते हुए चोरी की 4 एंड्रॉयड मोबाइल के साथ दो शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग लड़के को निरुद्ध किया गया है। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹80,000 बताई जा रही है।
गश्त के दौरान संदिग्ध अवस्था में धरे गए आरोपी---
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरपीएफ पोस्ट गया के उप निरीक्षक (एसआई) पवन कुमार, सीटीडीपीएस टीम और जीआरपी थाना गया के अधिकारियों की संयुक्त गश्ती टीम स्टेशन परिसर में सुरक्षा जांच कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफ़ॉर्म संख्या 01 सी के दिल्ली छोर पर स्थित पैसेंजर शेड में तीन लोग संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिए। पुलिस टीम को देखते ही तीनों छिपने और भागने का प्रयास करने लगे। गश्ती दल ने मुस्तैदी दिखाते हुए घेराबंदी कर तीनों को मौके पर ही धर दबोचा।
हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की पहचान (1) राकेश कुमार (24 वर्ष, निवासी सासाराम, रोहतास), (2) रोहित रोहाना (20 वर्ष, निवासी गुरारू, गया) तथा (3) रोहित कुमार (15 वर्ष, निवासी रामपुर, गया - नाबालिग) के रूप में हुई है। कड़ाई से पूछताछ करने पर तीनों ने स्वीकार किया कि वे स्टेशन पर ट्रेनों में चढ़ते-उतरते समय यात्रियों के सामान और कीमती मोबाइलों की चोरी करते थे।
नियमानुसार और विधिवत वीडियोग्राफी कराते हुए जब तीनों की तलाशी ली गई, तो उनके पास से कुल 4 एंड्रॉयड मोबाइल बरामद हुए।
राकेश कुमार:- 01 पोको (Poco) कंपनी का काला एंड्रॉयड फोन (बिना सिम कार्ड, चालू हालत)।
रोहित कुमार नाबालिग:- 01 रेडमी कंपनी का स्काई कलर एंड्रॉयड फोन बंद हालत।
रोहित रोहाना: 01 सैमसंग कंपनी का नीला एंड्रॉयड फोन (बिना सिम कार्ड, चालू हालत) एवं 01 रियलमी कंपनी का सिल्वर रंग का एंड्रॉयड फोन (बंद हालत)।
कानूनी कार्रवाई और मामला दर्ज--
घटना स्थल पर सभी आवश्यक कागजी कार्रवाई और विडियोग्राफी पूरी करने के उपरांत आरोपियों को जीआरपी थाना गया ले जाया गया। एसआई पवन कुमार द्वारा दी गई लिखित शिकायत के आधार पर जीआरपी थाना गया में कांड संख्या 199/2026, धारा 317(5) एवं 3(5) बी.एन.एस. (भारतीय न्याय संहिता) के तहत मामला पंजीकृत कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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