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सतबहिनी झरना तीर्थ बनाने वाली समिति के हनुमान भाई निरंजन सिंह नहीं रहे।

 झारखंड गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।




एटीएच न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना को सतबहिनी झरना तीर्थ बनानेवाली समिति के हनुमान भाई निरंजन सिंह नहीं रहे। इस सूचना को पाकर मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के प्रत्येक सदस्यों के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वीरान एवं गुमनाम होते जा रहे इस धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित एवं विकसित बनाने के लिए शुरू किए गए अभियान के पहले कदम से वे समिति के साथ चल रहे थे। उनके विषय में सभी लोगों के बीच यह धारणा प्रचलित थी कि निरंजन बाबू के शब्दकोष में नहीं शब्द है ही नहीं। दिन हो या आधी रात कभी भी किसी छोटे बड़े आयोजन के दौरान किसी वस्तु की जरूरत पड़ती और वह निकट में उपलब्ध नहीं होती तो उस स्थिति में केवल एक नाम याद आता था वह नाम निरंजन सिंह का था। कितनी भी दुर्लभ वस्तु हो वह कम से कम समय में सतबहिनी झरना तीर्थ समिति के पास उपलब्ध करा देना उनकी विशेषता थी। आज बरबस सभी सदस्यों के मुख पर यह बात आ रही है कि वह जिए भी सतबहिनी झरना तीर्थ के लिए और मरे भी तो सतबहिनी झरना तीर्थ को याद करते हुए। मालूम हो कि करीब 4 साल पहले उनके पैर में गंभीर इन्फेक्शन हो गया था। रांची में इलाज के दौरान काफी पैसे खर्च होने पर भी डॉक्टर ने हाथ खड़ा कर दिया था। उनके पास अब एक ही उपाय था कि उनके पैर को जांघ तक काटना पड़ेगा। लेकिन निरंजन सिंह के परिजन विशेष कर बड़े भाई सेवानिवृत शिक्षक चंद्रशेखर सिंह एवं भतीजा अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि अंतिम सांस तक हार नहीं मानेंगे और उन्हें लेकर इलाज के लिए सीएमसी हॉस्पिटल वेल्लोर चले गए। जहां कई महीनों तक इलाज कराने के बाद 18 - 20 लाख रुपए खर्च हुए लेकिन परिवार ने उनका पैर बचा लिया। वेल्लोर से वापस लौटने के बाद वह वाकर के सहारा लेकर चल पाते थे। लेकिन उस हाल में भी किसी कार्यक्रम या बैठक आदि में निश्चित रूप से सतबहिनी झरना तीर्थ पहुंच जाते थे। शरीर से अशक्त होने के बावजूद किसी जरूरत पर अपने सोर्स के माध्यम से उस वस्तु की व्यवस्था कर देने का ही नाम था निरंजन सिंह। उस इलाज के बाद वे बिल्कुल स्वस्थ थे। लेकिन हाल में पेट में सूजन बढ़ रही थी। इधर डॉक्टर को मामला समझ में नहीं आया। फिर से उन्हें सीएमसी हॉस्पिटल वेल्लोर ले जाया गया। वहां पेट में इन्फेक्शन बताया। इलाज के दौरान ही शनिवार दिन के 11:00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इस सूचना आने के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया। सतबहिनी विकास समिति के लोगों के ऊपर मानों वज्रपात हो गया। कुछ साल पहले निरंजन सिंह का किशोरावस्था में पहुंच चुके पुत्र का आकस्मिक निधन हो गया था। उनकी पत्नी प्रखंड की सहिया साथी नीलम सिंह पर एक के बाद एक वज्राघात होते जा रहा है। निरंजन सिंह अपने पीछे पत्नी व एक पुत्र छोड़ गए हैं। दो पुत्री की शादी कर चुके थे।  पुत्र अभी अविवाहित है। अपने दाहिने अंग को खोकर सतबहिनी विकास समिति के सभी अधिकारियों एवं सदस्यों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। इनमें सतबहिनी के संत हरिदास जी महाराज, समिति के अध्यक्ष सह विश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नरेश प्रसाद सिंह, सचिव पंडित मुरलीधर मिश्र, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष विभूति नारायण दुबे, सदस्य प्रियरंजन सिन्हा, सुदर्शन तिवारी, नवल किशोर तिवारी, गोपी सिंह, अमरेंद्र पंडित, राम रंजन, आदित्य पाठक, विनोद कुमार सिंह, अखिलेश सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह, राम ध्यान शाह, दिलीप कुमार पांडेय, रघुनंदन राम, अवधेश कुमार गुप्ता, देवी दयाल राम, सुखदेव साह आदि का नाम शामिल है। उनका शव विमान से रांची लाया जा रहा है। वहां से सड़क मार्ग से घर लाया जाया जाएगा।

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