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मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के हनुमान भाई निरंजन सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में हुआ विलीन।

 झारखंड गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।





एटीएण न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ को शून्य से शिखर तक पहुंचने वाली मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति के हनुमान भाई निरंजन सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। वेल्लोर से विमान द्वारा रांची एवं सड़क मार्ग से पैतृक आवास सरकोनी पहुंचने पर परिजनों के साथ-साथ ग्राम वासियों के चित्कार से आकाश भी विलाप करने लगा। मौके पर हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। उनके समाजसेवी चरित्र एवं स्वभाव को लेकर महिलाएं एवं पुरुष सभी आंसू बहा रहे थे। जबकि पत्नी नीलम देवी पुत्री एवं पुत्र को रोने पीटने की स्थिति में संभालना मुश्किल हो रहा था। मालूम हो कि पेट में इंफेक्शन होने से उनकी तकलीफ बढ़ती जा रही थी। एक बार रांची में इलाज कराने के बाद डॉक्टर ने छुट्टी देकर घर वापस भेज दिया था। बाद में फिर उनकी तकलीफ बढ़ने लगी तो परिजन उनको लेकर सीएमसी हॉस्पिटल वेल्लोर चले गए। वहां पर स्थिति और नाजुक हो गई। जहां 17 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के लिए बोला था। जब तक परिजन ऑपरेशन के लिए वहां पहुंचते कि 18 जुलाई को पूर्वाहन 11:00 उन्होंने अंतिम सांस ले ली।


रविवार की सुबह  पार्थिव शरीर को विमान से रांची लाया गया। वहां से सड़क मार्ग से चलकर पैतृक आवास सरकोनी करीब 4:00 बजे पहुंचे। पहुंचते ही सैकड़ो की संख्या में लोग एक बारगी रो पड़े।  तैयारी करके शव यात्रा निकली। जिसमें सैकड़ो की संख्या में लोग शामिल थे। सोन नदी में भाई निरंजन सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। उनके पुत्र राजीव रंजन सिंह उर्फ बबल ने पिता को मुखाग्नि दी। इस मौके परअरुण सिंह, आतिश कुमार सिंह, दिनेश कुमार, शशि रंजन दुबे, अजय सिंह, प्रवीण सिंह, सुदर्शन तिवारी, अखिलेश सिंह, कामेश्वर दुबे, ब्रज मोहन मिश्रा, प्रबोध सिंह, असर्फी सिंह, शिव प्रसाद गुप्ता सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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