मिथिलेश कुमार पाण्डेय व्यूरो चीफ औरंगाबाद।
औरंगाबाद। आज दिनांक 18/07/2026 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण पटना के निर्देशानुसार 18 जुलाई 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण औरंगाबाद के तत्वावधान में व्यवहार न्यायालय परिसर औरंगाबाद में पराक्रम लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस से संबंधित मामलों के सौहार्दपूर्ण निस्तारण हेतु विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष राजीव रंजन कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण औरंगाबाद द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह में अरुण कुमार प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय, विश्वविभूति गुप्ता, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, तान्या पटेल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद सहित जिले के सभी न्यायिक पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने कहा कि—*लोक अदालत न्याय व्यवस्था का एक प्रभावी एवं जनहितकारी मंच है जो पक्षकारों को त्वरित सुलभ एवं कम खर्चीला न्याय उपलब्ध कराता है। चेक बाउंस से संबंधित मामलों का समझौते के आधार पर निस्तारण न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करता है बल्कि पक्षकारों के मध्य सौहार्दपूर्ण संबंधों को भी बनाए रखता है। लोक अदालत की सफलता जनसहभागिता एवं आपसी सहयोग पर आधारित है। सभी नागरिकों एवं अधिवक्ताओं को इस वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली का अधिकाधिक लाभ उठाना चाहिए*।
विशेष लोक अदालत के सफल संचालन हेतु कुल 03 बेंचों का गठन किया गया था। जिनके समक्ष चेक बाउंस से संबंधित मामलों को सुलह एवं समझौते के आधार पर निस्तारण हेतु रखा गया। पक्षकारों, अधिवक्ताओं एवं बैंक प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता से अनेक मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो सका।
इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद, सुश्री तान्या पटेल ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार आयोजित इस विशेष लोक अदालत का उद्देश्य चेक बाउंस से संबंधित मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण कर पक्षकारों को शीघ्र एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है।
इस विशेष लोक अदालत में कुल 290 वादों को सूचीबद्ध किया गया, जिनमें से 15 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया तथा लगभग ₹58,36,688/- की राशि का समझौता संपन्न कराया गया। इससे पक्षकारों को त्वरित न्याय प्राप्त हुआ तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के भार को कम करने में सहायता मिली।
*इस अवसर पर राजीव रंजन कुमार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद ने विशेष लोक अदालत में निस्तारित कुछ वादों के पक्षकारों को स्वयं अपने कर-कमलों से लोक अदालत अवार्ड की प्रतियां प्रदान कीं। अवार्ड प्राप्त करते समय पक्षकारों के चेहरों पर संतोष, प्रसन्नता एवं राहत का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा था। वर्षों से लंबित विवादों का आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर समाधान होने से संबंधित पक्षकारों ने लोक अदालत के प्रति अपनी संतुष्टि व्यक्त की। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पक्षकारों को आपसी संवाद एवं सौहार्द के माध्यम से विवादों के समाधान की भावना को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। यह दृश्य लोक अदालत की मूल भावना — "सुलभ, त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण न्याय" — का सजीव उदाहरण बन गया, जहाँ न्याय केवल एक निर्णय नहीं बल्कि आपसी विश्वास, सामाजिक सद्भाव एवं रिश्तों की पुनर्स्थापना का माध्यम बनकर सामने आया।*
कार्यक्रम के सफल आयोजन में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक प्रतिनिधियों, न्यायालय कर्मियों एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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