संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH न्यूज़ 11 GROUP:-गयाजी पितृपक्ष मेला, 2026 के पावन अवसर पर जिला प्रशासन, गया द्वारा ‘‘हमर मगध’’ सेमिनार का भव्य आयोजन किया गया। इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को मगध क्षेत्र के स्वर्णिम इतिहास, ज्ञान परंपरा, कला, साहित्य और सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के आगमन, राष्ट्रगान, दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वागत समारोह के साथ हुआ।
विभिन्न सत्रों में विद्वानों का विमर्श...
सेमिनार के दौरान मगध के विविध आयामों पर विषय विशेषज्ञों और विद्वानों ने अपने विचार साझा किए
इतिहास एवं विरासत: डॉ. मनीष सिन्हा एवं प्रो. सुधांशु झा ने मगध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वैश्विक पहचान पर प्रकाश डाला।
शिक्षा, संस्कार एवं संस्कृति: डॉ. राम कृष्ण मिश्र ने मगध की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को रेखांकित किया।
आध्यात्मिक पृष्ठभूमि स्वामी वेंकटेश्वरानाचार्य जी महाराज ने क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना पर चर्चा की।
कला, साहित्य एवं संगीत (पं.) राजेन्द्र सिजुआर, प्रो. (डॉ.) के. के. नारायण एवं डॉ. राकेश कुमार सिन्हा (रवि) ने मगध के संगीतमय एवं साहित्यिक वैभव को प्रस्तुत किया।
मगही भाषा एवं लोकजीवन डॉ. सच्चिदानंद प्रेमी ने मगही भाषा की मिठास और आम जीवन से इसके जुड़ाव पर विचार रखे।
कार्यक्रम में युवाओं की भी सक्रिय सहभागिता रही, जहाँ चयनित पाँच छात्र-छात्राओं ने मगध की ज्ञान परंपरा पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
जिलाधिकारी ने मगही में दिया संदेश...
जिलाधिकारी ने अपने संबोधन की शुरुआत स्थानीय मगही भाषा में करते हुए कहा कि मगध की धरती पर बुद्ध और महावीर के शांति व अहिंसा का संदेश आज भी गूंजता है। पाटलिपुत्र के वैभव और नालंदा के ज्ञान से पूरी दुनिया आलोकित हुई है। उन्होंने कहा कि मगही हमारी पहचान और संस्कार है। भाषा के समृद्ध होने से ही राष्ट्र समृद्ध होता है। उन्होंने युवाओं से एकजुट होकर मगध के विकास और नालंदा की ज्ञान परंपरा को पुन जागृत करने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं सम्मान समारोह...
सेमिनार के उपरांत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें आशुतोष एवं जगजीत रौशन द्वारा गायन की प्रस्तुतियां दी गईं।
गया के कलाकारों द्वारा बिहार लोक नृत्य प्रस्तुत किया गया।
जी.डी. गोयनका स्कूल तथा गुरुकुल संगीत विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागी विद्यार्थियों एवं सहयोगी कलाकारों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। अंत में बिहार गीत की संगीतमय प्रस्तुति के साथ सेमिनार का समापन हुआ।

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