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जड़ार के स्वयंभू शिवलिंग से निकले सदियों पुराने सिक्के, पढ़े रहस्य...

 


 


महराजगंज। भिटौली थाना क्षेत्र के ग्राम सभा जड़ार स्थित प्राचीन शिव मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर में स्थापित स्वयंभू शिवलिंग की पूजा-अर्चना लंबे समय से होती चली आ रही है। स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया है। मंदिर के मुख्य द्वार की चौखट पर देवनागरी लिपि के कुछ पुराने अक्षरनुमा चिह्न दिखाई देते हैं, जिन्हें फिलहाल स्पष्ट रूप से पढ़ा नहीं जा सका है।

 मंदिर की पुजारिन के अनुसार---

 2026 के सावन मास में रक्षाबंधन के दिन पूजा के दौरान शिवलिंग के चारों ओर स्थित अरघे में अचानक दरार जैसी स्थिति दिखाई दी और शिवलिंग का कुछ हिस्सा अरघे से थोड़ा ऊपर उठा नजर आया। इसी दौरान एक पुराना गोल सिक्का निकलकर उनके सामने गिरने की बात कही गई। पुजारिन के मुताबिक सिक्के पर पुराने अशोक चिन्ह जैसा निशान दिखाई दे रहा था।

पुजारिन का दावा है कि इसके अगले दिन पूजा के दौरान शिवलिंग के फटे हुए हिस्से से एक और पुराना पीले रंग का सिक्का बाहर निकला। इस असामान्य घटना से वह भयभीत हो गईं और उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी अपने पति को दी।

 रहस्य यहीं नहीं थमा-

 पुजारिन के अनुसार करीब पांचवें दिन पूजा के समय उसी स्थान से एक और पुराना सिक्का बाहर निकला, जिस पर  एक किंग का चित्र और क्यूबा से संबंधित चिह्न होने की बात बताई जा रही है। मंदिर की देवनागरी लिपि वाले हिस्से के निचले भाग से पानी का रिसाव शुरू होने का दावा भी किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का रिसाव कई लोगों ने प्रत्यक्ष देखा है।

 सिक्कों की उम्र और असलियत अब भी पहेली--

मंदिर में मिले बताए जा रहे पुराने सिक्कों को ग्रामीणों ने कुछ जानकारों को दिखाया, लेकिन उनकी वास्तविक प्राचीनता, धातु और ऐतिहासिक काल को लेकर अभी कोई प्रमाणित निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यही वजह है कि इन घटनाओं को लेकर आस्था के साथ-साथ कौतूहल और रहस्य भी बढ़ता जा रहा है।

घटना की चर्चा फैलने के बाद जड़ार स्थित मंदिर में लोगों का आना-जाना बढ़ गया है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की अद्भुत लीला और आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे मामले की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक जांच की आवश्यकता बता रहे हैं।

 आस्था का केंद्र बन रहा प्राचीन मंदिर---

ग्रामीणों का कहना है कि यदि मंदिर परिसर में मिले सिक्के वास्तव में पुराने और ऐतिहासिक हैं तो उनका संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण होगा। मंदिर की चौखट पर मौजूद अपठनीय देवनागरी अक्षरों तथा सिक्कों की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए तो मंदिर के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

स्थानीय लोगों की मांग है कि पुरातत्व, इतिहास और सिक्का विशेषज्ञों की टीम से मंदिर और कथित रूप से मिले सिक्कों की जांच कराई जाए, ताकि आस्था से जुड़े इस स्थल की वास्तविक ऐतिहासिकता सामने आ सके और किसी भी प्राचीन धरोहर को नुकसान न पहुंचे।

जड़ार का यह शिव मंदिर फिलहाल आस्था, इतिहास और रहस्य—तीनों का संगम बना हुआ है। अब देखना यह है कि विशेषज्ञों की जांच इस रहस्य से पर्दा उठाती है या यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव की अनोखी लीला के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करता है।

         प्रभारी महराजगंज 

            कैलाश सिंह.

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