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घोर लापरवाही के कारण एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है आखिर वह संकट क्या है आईए जानते हैं खबर के माध्यम से।

 गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।




एटीएच न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड में बीएलओ, राजनीतिक जनप्रतिनिधियों और स्वयं मतदाताओं की घोर लापरवाही के कारण एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रखंड के कुल 11,200 से भी अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रखंड में अभी भी कुल 17 प्रतिशत मतदाताओं का मैपिंग कार्य होना बाकी है, जिससे निर्वाचन विभाग की तैयारियों पर बड़ा असर पड़ रहा है। उक्त मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि आगामी 20 जून से विधिवत रूप से एसआईआर प्रक्रिया प्रारंभ होने जा रही है। इससे ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की मैपिंग न होना स्थानीय प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गया है। यदि निर्धारित समय के भीतर मैपिंग पूरी नहीं की गई, तो इन सभी 11,200 से अधिक वोटरों के नाम मतदाता सूची से पूरी तरह हटा दिए जाएंगे। ऐसी स्थिति में  नागरिक अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार यानी मतदान से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे।

मिली जानकारी के अनुसार, बीडीओ राकेश सहाय ने इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए कई बार क्षेत्र के सभी मुखिया, पंचायत समिति सदस्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं व पदाधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से इस कार्य में व्यक्तिगत दिलचस्पी लेने और ग्रामीणों को जागरूक करने का विशेष अनुरोध किया था। इसके बावजूद भी मैपिंग की रफ्तार में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला, जिसके कारण आज हजारों मतदाताओं का भविष्य मझधार में लटका हुआ है।77-बिश्रामपुर विधानसभा क्षेत्र की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

सामने आई '77-बिश्रामपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र' की '80 प्रतिशत से कम मैपिंग रिपोर्ट' से इस लापरवाही की पोल खुली है। रिपोर्ट के मुताबिक, कांडी प्रखंड के कई मतदान केंद्रों पर स्थिति बेहद चिंताजनक है: अपग्रेडेड मिडिल स्कूल शिवरी भाग संख्या 9 यहाँ मैपिंग का प्रतिशत सबसे कम मात्र 65.82% है।

अपग्रेडेड प्राइमरी स्कूल रामबांध (भाग संख्या 37 यहाँ केवल 70.05%

मतदाताओं की मैपिंग हुई है।बुनियादी स्कूल कुशहा भाग संख्या 53 यहाँ भी आंकड़ा महज 70.14% पर अटका है। इसके अलावा अधौरा, मंडरा, पतीला, भरत पहाड़ी, जमुआ, सड़की और सतबहिनी सहित करीब 16 से अधिक बूथ ऐसे हैं जहाँ मैपिंग का कार्य 80 प्रतिशत से भी नीचे है।

समय रहते यदि प्रखंड के जागरूक नागरिक, बीएलओ और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिशन मोड में आकर छूटे हुए मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं करवाते हैं, तो कांडी प्रखंड को आगामी चुनावों में एक बड़ी राजनीतिक और लोकतांत्रिक क्षति उठानी पड़ सकती है।

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