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विश्व महिला अध्ययन सम्मेलन 2026 सीयूएसबी की प्रो. समापिका महापात्रा ने गैर विषमलैंगिकों की स्थिति' पर प्रस्तुत किया शोध।






संपादक डॉ मदन मोहन मिश्रा की रिपोर्ट।




ATH NEWS 11 GROUP :-गयाजी बिहार दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय सीयूएसबी के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. समापिका महापात्रा ने थाईलैंड के चियांग माई में आयोजित प्रतिष्ठित 12वें विश्व महिला अध्ययन सम्मेलन डब्ल्यूसीडब्ल्यूएस 2026 में देश और विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। प्रो. महापात्रा ने 'एम्प्रेस चियांग माई होटल' में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर “फाइट्स फॉर अनस्पीकेबल प्लाइट्स नॉन-हेट्रोसेक्सुअल्स एलजीबीटीक्यूआई प्लस स्टेटस इन ए जेन्ड्रेड वर्ल्ड" शीर्षक से अपना अग्रणी शोधपत्र प्रस्तुत किया। इस शोधपत्र का चयन सम्मेलन की वैज्ञानिक समीक्षा समिति द्वारा एक कठोर पीर-रिव्यु सहकर्मी-समीक्षा प्रक्रिया के बाद किया गया था।

​कुलपति ने जताई प्रसन्नता---

सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इस वैश्विक उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रो. महापात्रा की यह प्रस्तुति विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। इसने वैश्विक प्रभाव वाले और सामाजिक रूप से परिवर्तनकारी शोध के प्रमुख केंद्र के रूप में सीयूएसबी की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ किया है। यह सफलता विश्वविद्यालय की उच्चस्तरीय शोध मार्गदर्शन और अंतर-संस्थागत सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

​सामूहिक प्रयास से तैयार हुआ शोधपत्र विश्वविद्यालय के जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस महत्वपूर्ण शोधपत्र की मुख्य लेखिका प्रो. समापिका महापात्रा हैं। इसमें उनके साथ सह-लेखकों के रूप में केआईआईटी (KIIT) विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर की सहायक प्राध्यापक डॉ. बिनीता बेहरा और सीयूएसबी के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के पीएच.डी. शोधार्थी  प्रेम प्रकाश शामिल हैं। प्रतिष्ठित विद्वानों और शोधार्थियों की इस सहभागिता ने अध्ययन को और अधिक गहराई प्रदान की है।

​क्या है शोध का मुख्य विषय--

यह अध्ययन लैंगिक मानदंडों से भिन्न पहचान रखने वाले और गैर-विषमलैंगिक (LGBTQI+) व्यक्तियों के सामने आने वाली संरचनात्मक हिंसा, सामाजिक कलंक तथा कानूनी कमियों का एक गहन और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह इस वर्ष के सम्मेलन की मुख्य थीम “संवाद की शक्ति आवाज़हीनता की परिस्थितियों का उन्मूलन” के पूरी तरह अनुकूल रहा।

​संवाद से बदलेगी समाज की दिशा प्रो. महापात्रा---

अपनी इस उपलब्धि पर प्रो. समापिका महापात्रा ने कहा, थाईलैंड में इस शोधकार्य को प्रस्तुत करना हमारे लिए मानवाधिकारों और संरचनात्मक हिंसा से जुड़े वैश्विक विमर्श के केंद्र में सीयूएसबी को स्थापित करने का एक बड़ा अवसर था। यह हमारे पूरे दल की सामूहिक सफलता है। संवाद की शक्ति के माध्यम से हमारा प्रयास उन परिस्थितियों को समाप्त करना है जो LGBTQI+ समुदाय को हाशिए पर धकेलती हैं, ताकि समाज को अधिक समतामूलक और न्यायपूर्ण बनाया जा सके।

​इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने सीयूएसबी के प्रतिनिधियों को विश्वभर के दिग्गज शिक्षाविदों, समाजशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं के साथ संवाद और नेटवर्किंग करने का एक बेहतरीन मंच प्रदान किया है।

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