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मगध विश्वविद्यालय में ‘बदलती दुनिया, बदलती हिंदी’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी हुआ आयोजित; मेधावी छात्र सम्मानित।





संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।



ATH NEWS 11 GROUP :-बोधगयाजी मगध विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर ‘बदलती दुनिया, बदलती हिंदी’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी, कुलसचिव प्रो. बिनोद कुमार मंगलम, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के आलोचक प्रो. सदानंद शाही तथा अन्य मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई।

​पुस्तक का विमोचन एवं प्रतियोगिता विजेताओं का सम्मान

संगोष्ठी के दौरान हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. राकेश कुमार रंजन की नवप्रकाशित पुस्तक ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यासों में मुस्लिम जीवन’ का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। अतिथियों ने पुस्तक को सामाजिक और साहित्यिक अध्ययन के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। इसके अतिरिक्त, अगस्त माह में आयोजित भाषण प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को स्वर्ण एवं रजत पदक प्रदान कर पुरस्कृत किया गया।

​प्रमुख वक्ताओं के विचार...

​प्रो. दिलीप कुमार केशरी कुलपति हिंदी की व्यापकता और समावेशी प्रकृति ही इसकी मुख्य पहचान है। समय के साथ नए शब्दों और प्रयोगों को स्वीकार करना भाषा के प्रवाह के लिए आवश्यक है। हिंदी भारतीय समाज और संस्कृति को जोड़ने वाली मजबूत कड़ी है।

​प्रो. बिनोद कुमार मंगलम कुलसचिव तकनीक और वैश्वीकरण के इस दौर में शॉर्टकट के बजाय निरंतर परिश्रम और अध्ययन की आवश्यकता है। हिंदी को अंग्रेजी से कमतर आंकने की मानसिकता बदलनी होगी और इसे आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़कर समृद्ध बनाना होगा।

​प्रो. सदानंद शाही मुख्य अतिथि एआई (AI) और बाजार के नए उपनिवेशवाद के इस दौर में मनुष्य की संवेदना और विवेक को बचाए रखना जरूरी है। हिंदी के सामने अपनी मौलिकता को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता के साथ कदमताल करने की मुख्य चुनौती है।

​प्रो. आनंद कुमार सिंह विभागाध्यक्ष हिंदी भाषा की सबसे बड़ी ताकत उसकी ग्रहणशीलता है। बदलते दौर में तकनीक और शिक्षा के माध्यम से हिंदी के शब्द-भंडार और अभिव्यक्ति की शैलियों का विस्तार हो रहा है।

​डॉ. चाहत अन्वी व ज्योति रीता डॉ. चाहत अन्वी ने डिजिटल युग में हिंदी की बढ़ती प्रासंगिकता पर बल दिया, वहीं कवयित्री ज्योति रीता ने काव्य पाठ के माध्यम से हिंदी की संवेदनशीलता को रेखांकित किया। गया कॉलेज के प्रो. राम उदय कुमार ने कहा कि भाषा का बदलना उसकी जीवंतता का प्रमाण है।

​कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. परम प्रकाश ने किया तथा चांदनी बसोया ने संगीतमय प्रस्तुति दी। इस दौरान डॉ. राकेश कुमार रंजन, डॉ. अनुज कुमार तरुण, प्रो. मनीष कुमार सिन्हा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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