गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।
एटीएच न्यूज़ 11:- केंद्र और राज्य सरकारें भले ही हर गरीब को पक्का मकान देने का दम वादा करतीं हों, लेकिन धरातल पर सरकारी मशीनरी और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही दावों की हवा निकल रही है। ताजा मामला गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत गडा़खुर्द पंचायत के सुंडीपुर गांव का है। 58 वर्षीय अशर्फी विश्वकर्मा (पिता: स्वर्गीय रामदास विश्वकर्मा) आज प्रशासनिक बेरुखी के कारण दाने-दाने को मोहताज और बेघर होने की कगार पर हैं।
पीड़ित अशर्फी विश्वकर्मा ने भरे गले से अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके परिवार में 7 से 8 सदस्य हैं। सभी एक जर्जर मिट्टी के मकान में रहने को मजबूर हैं। बीते दिनों उनका यह एकमात्र आशियाना था जो गिरकर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। घर का जो हिस्सा बचा है, वह भी कभी भी जमींदोज हो सकता है। अशर्फी विश्वकर्मा को सबसे बड़ा डर आगामी मानूसन और बारिश के मौसम को लेकर सता रहा है। उन्होंने बताया, "बारिश का मौसम सिर पर है। मेरा घर टूट चुका है। इस हालत में, मैं अपने 8 सदस्यों के परिवार को लेकर कहां जाऊंगा? कैसे जिंदा रहूंगा?" पीड़ित ने बताया कि उन्होंने आवास के लिए स्थानीय मुखिया, पंचायत सेवक और स्वयंसेवक समेत तमाम जिम्मेदारों के चक्कर काटते रहे लेकिन किसी ने आगे बढ़कर उनकी मदद कोई नहीं किया। हर किसी को अपनी आपबीती सुनाई, लेकिन किसी के उस गरीब व्यक्ति का फरीयाद नहीं सुनी। सरकार का संकल्प है कि कोई भी गरीब बिना पक्के मकान के न रहे। इसके बावजूद, कांडी प्रखंड के सुंडीपुर में अधिकारियों और प्रतिनिधियों की घोर लापरवाही के कारण एक अत्यंत पात्र व्यक्ति आज भी सरकारी आवास से वंचित है। पीड़ित परिवार अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। थक-हारकर पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि अधिकारी स्वयं आकर उनके गिरे हुए मकान की स्थिति देखें और जल्द से जल्द उन्हें सरकारी आवास मुहैया कराएं। ताकि बरसात के मौसम में उनका भी परिवार राहत की सांस ले सकें।

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