संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATHNEWS 11GROUP:- बोधगयाजी मगध विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा शनिवार को 'राम की शक्तिपूजा का पुनर्पाठ' विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। हिंदी भवन के प्रेमचंद सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम् ने शिरकत की। आधुनिक रामायण है निराला की कृति अपने संबोधन में प्रो. मंगलम् ने सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की प्रसिद्ध रचना 'राम की शक्तिपूजा' को आधुनिक काल का रामायण करार दिया। उन्होंने कहा कि निराला ने बांग्ला रामायण के सूत्रों को आधार बनाकर रामकथा को आधुनिक दृष्टि से पुनर्जीवित किया है। उन्होंने कविता के बिंबों, प्रतीकों और भाव-संरचना का विश्लेषण करते हुए इसे त्याग और आत्मबल की चरम अभिव्यक्ति बताया। शक्ति की साधना और विजय प्रो. मंगलम् ने राम और रावण के युद्ध के मनोवैज्ञानिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब शक्ति अधर्म के साथ खड़ी महसूस होती है, तब मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी कठिन साधना करनी पड़ती है। उन्होंने राम द्वारा 108 कमल अर्पित करने और अंततः अपना नेत्र अर्पित करने की तत्परता को अटूट आस्था का प्रतीक बताया, जिससे शक्ति का प्राकट्य संभव हो सका।
साहित्यिक गहराई और सामंजस्य,:-
व्याख्यान के दौरान उन्होंने निराला की काव्य प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि इस कविता में युद्ध, प्रेम, निराशा और आशा जैसे विरोधी तत्वों का अद्भुत सामंजस्य है। उन्होंने सीता-राम मिलन प्रसंग को आधुनिक छायावादी संवेदना की उत्कृष्ट मिसाल बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार सिंह ने की। डॉ. परम प्रकाश राय ने विषय प्रवर्तन करते हुए रामस्वरूप चतुर्वेदी और नामवर सिंह जैसे विद्वानों के विचारों के आलोक में कविता की व्यापकता पर चर्चा की।
मंच संचालन डॉ. सुशीला कुमारी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुज कुमार तरुण ने दिया। इस अवसर पर डॉ. राकेश कुमार रंजन, डॉ. पौलटी कुमारी, डॉ. दिलीप कुमार केसरी, डॉ. मुनेश्वर प्रसाद, प्रो. कृष्णदेव प्रसाद वर्मा और डॉ. किरण कुमारी समेत बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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