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कागजों में खिले आंगनवाड़ी, हकीकत में सूने केंद्र — बच्चों के नाम पर सिस्टम में बड़ा खेल.




महराजगंज:-जनपद के सदर ब्लॉक में कई संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक होती जा रही है। सरकार द्वारा बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भारी बजट खर्च किया जा रहा है, लेकिन कई केंद्रों पर यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमटती नजर आ रही है।प्राइमरी के बच्चों को दिखाकर  काम चलता रहता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई आंगनवाड़ी केंद्र ऐसे हैं जहां बच्चों की उपस्थिति लगभग शून्य रहती है, जबकि उपस्थिति पंजिका में दर्ज आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। मौके पर पहुंचने पर केंद्रों में केवल कार्यकर्त्री बैठी मिलती हैं, बच्चों का कहीं नामोनिशान नहीं होता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यकर्त्रियों द्वारा घर-घर जाकर बच्चों को बुलाने में भी रुचि नहीं दिखाई जाती। कई बार यह भी सुनने में आता है कि शासन के अन्य कार्यों का दबाव होने के कारण वे बच्चों को केंद्र तक लाने की जिम्मेदारी से बचती हैं। इससे बच्चों की शुरुआती शिक्षा की नींव ही कमजोर हो रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब भी किसी अधिकारी के निरीक्षण की सूचना मिलती है, उससे पहले ही केंद्रों की व्यवस्था अचानक दुरुस्त हो जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर निरीक्षण की जानकारी पहले कैसे पहुंच जाती है? क्या इसमें कहीं न कहीं सिस्टम की मिलीभगत तो नहीं?

जब इस संबंध में संबंधित सुपरवाइजर से बात की जाती है तो केवल आश्वासन ही मिलते हैं, लेकिन जमीनी सुधार कहीं नजर नहीं आता।

आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के भविष्य की पहली सीढ़ी माने जाते हैं, लेकिन इस तरह की लापरवाही और कथित अनियमितताओं से न केवल सरकारी योजनाओं पर पानी फिर रहा है, बल्कि जिले के विकास पर भी असर पड़ रहा है।

अब सवाल यह है कि:-क्या जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेंगे?

क्या आंगनवाड़ी व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?

जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि कब इस लापरवाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जाएगी, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

       प्रभारी महराजगंज

          कैलाश सिंह.

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