मिथिलेश कुमार पाण्डेय व्यूरो चीफ औरंगाबाद।
औरंगाबाद।आज दिनांक 27/05/2026 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार एनआई अधिनियम (धारा 138 के अन्तर्गत बहुत सारे मामलें न्यायालय में लम्बित है जिनमें मुख्य रूप से चेक अनादरण से सम्बन्धि मामले शामिल है। ये मामलें वित्तीय प्रकृति के और समझौता योग्य होने के कारण लोक अदालत जैसे वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्रों के माध्यम से निपटाये जाने के लिए विशेष रूप से उपयुक्तता को देखते हुए लम्बित मामलों को कम करने और विवादो के शीघ्र और सार्थक समाधान को सुगम बनाने के उददे्ष्य से 18 जुलाई, 2026 को परक्राम्य लिखत अधिनियम (धारा 138 से सम्बन्धित मामलों का निस्तारण हेतु विशेष लोक अदालत का आयोजन करते हुए मामलें को प्राथमिकता के स्तर पर निस्तारण किया जायेगा। परक्राम्य लिखित अधिनियम से सम्बन्धित अधिक से अधिक मामलों का निस्तारण संभव हो इस हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव, तान्या पटेल ने एनआई अधिनियम के तहत मामलें को देखने वाले विद्वान अधिवक्ताओं के साथ अपने प्रकोष्ठ में एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें जिला विधिज्ञ संघ के सचिव, जगनारायण सिंह, उपाध्यक्ष उदय सिन्हा सहित वरिष्ठ अधिवक्ता जिनमें संजय गुप्ता, अशोक गुप्ता, अंजनी कुमार सिंह, मनोज मिश्रा, कृष्ण प्रताप सिंह, सतीष कुमार स्नेही इत्यादि की उपस्थिति रही। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तान्या पटेल द्वारा उपस्थित अधिवक्ताओं से कहा गया कि एक पहला मौका है जिसमें एनआई अधिनियम से जुडे़ मामलों के निस्तारण के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विशेष पहल करते हुए विशेष लोक अदालत का आयोजन करने का निर्देश दिया गया है। सचिव ने उपस्थित सभी विद्वान अधिवक्ताओं को आह्वान किया कि इस हेतु अपने स्तर से पहल करना शुरू कर दें, जिससे कि आपके पास लम्बित इस तरह के मामलों को विशेष लोक अदालत में निस्तारण की कार्रवाई सुनिश्चित किया जा सके। सचिव द्वारा बताया गया कि इस हेतु प्री-काॅन्सेलिंग की आवश्यकता होगी तो उसके लिए पक्षकारों के बीच विशेष सत्र आयोजित कर एनआई अधिनियम से जुडे मामलों के निस्तारण के लिए प्रेरित किया जायेगा और उनके सम्मुख आने वाले समस्याओं को दूर किया जायेगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तान्या पटेल द्वारा यह भी बताया गया कि न्यायालय स्तर से वैसे वादों की प्राप्त सूची के आलोक में सम्बन्धित पक्षकार को नोटिस प्रेषित करने की कार्रवाई की जा रही है। सचिव द्वारा जिला जिलावासियों से भी अपील किया गया कि एनआई अधिनियम से सम्बन्धित उनके मामलें जिस न्यायालय में लम्बित हो इसकी जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकार को देना सुनिश्चित करें और स्वयं भी प्री-काॅन्सेलिंग या विशेष लोक अदालत के दिन उपस्थित रहें, जिससे कि उनका मामला विशेष लोक अदालत के माध्यम से निस्तारण कराया जा सके।

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