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औरंगाबाद में राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों के निस्तारण के टूटे सभी रिकॉर्ड-पढ़े खबर कैसे?



मिथिलेश कुमार पाण्डेय व्यूरो चीफ औरंगाबाद।


औरंगाबाद। आज दिनांक 12/09/2026 जिला विधिक सेवा प्राधिकार औरंगाबाद के तत्वावधान में आज राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन व्यवहार न्यायालय औरंगाबाद में तथा अनुमण्डलीय व्यवहार न्यायालय दाउदनगर में किया गया। इस राष्ट्रीय लोक का मुख्य उद्घाटन समारोह व्यवहार न्यायालय परिसर में प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष आनंदिता सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अरूण कुमार, जिला पदाधिकारी के प्रतिनिधि, उप विकास आयुक्त कुमारी अनुपम सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रतिनिधि बिनोद सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तान्या पटेल, जिला विधि संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह के द्वारा सर्वप्रथम राष्ट्रीय गीत, वन्दे मातरम, एवं राष्ट्रगान के बाद संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इस उद्घाटन समारोह में काफी संख्या में न्यायिक पदाधिकारीगण, अधिवक्तागण, बैंक, बीमा के पदाधिकारीगण अन्य विभागों के पदाधिकारीगण तथा वादकारीगण उपस्थित रहें। पुरे कार्यक्रम का संचालन अभिनन्दन कुमार, उपमुख्य बचाव अधिवक्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आगंतुको का स्वागत अभिभाषण जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव तान्या पटेल द्वारा किया गया तथा मंच पर उपस्थित सभी वरीय न्यायाधीश को राष्ट्रीय लोक अदालत में हर प्रकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि जितने भी वादकारीगण यहां आये हैं। आप सभी के सहयोग से ही राष्ट्रीय लोक अदालत एक मुकम्मल स्थान को पा रहा है। उन्होंने कहा कि आज दिन हम सभी के लिए अतिमहत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में यह राष्ट्रीय लोक अदालत ’’सबके लिए न्याय’’ की संवैधानिक भावना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और लोक अदालत केवल लम्बित मामलों का निस्तारण का एक माध्यम नहीं है। बल्कि यह आपसी समझ,, सहमति, सौहार्द एवं मेल मिलाप के विवादों के स्थायी समाधान का मंच है। इसका उद्देश्य पक्षकारो को त्वरित, सुलभ एवं बिना खर्चे का न्याय उपलब्ध करना है। इसमें विवाद का समाधान केवल न्यायालय द्वारा नहीं बल्कि पक्षकारो की स्वेच्छा और सहमति से होता है। दूसरे संबोधन में जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह में मंच पर उपस्थित सभी को अभिवादन करते हुए कहा गया कि आज का दिन सौहाद्र को बढ़ाने वाला दिन है और इस अवसर का ज्यादा से ज्यादा लोग लाभ उठायें राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से छोटे-छोटे वाद के निस्तारण के पर्याप्त अवसर मिलता है इसका लाभ उठायें। विधि संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय द्वारा कहा गया कि सभी के सहयोग से ही राष्ट्रीय लोक अदालत को सम्पन्न किया जाता है और इसके लिए अपने अधिवक्ता साथियों को भरपुर सहयोग करने के लिए मंच से ही आह्वान किया गया। 

       


अपने सम्बोधन में पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि बिनोद सिंह ने राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह त्वरित रूप से वाद का निस्तारण का मंच है इसका लोग अधिक से अधिक लाभ उठायें। 


जिला पदाधिकारी प्रतिनिधि-सह-उप विकास आयुक्त ’’कुमारी अनुपम सिंह’’ ने राष्ट्रीय लोक अदालत के संदर्भ में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तीन प्रमुख अंग ’’कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए जनहित एवं जनकल्याण के लिए कार्य करते हैं। वहीं ’’मीडिया लोकतंत्र के चौथे स्तंभ’’ के रूप में इन प्रयासों को आमजन तक पहुँचाने तथा लोगों को उनके अधिकारों और उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि ’’राष्ट्रीय लोक अदालत’’ आम नागरिकों को सुलह एवं समझौते के माध्यम से अपने विवादों का त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण समाधान प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका तथा मीडिया सभी का व्यापक उद्देश्य यही है कि ’’नागरिकों को बेहतर से बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध हों। उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो और समाज में न्याय, शांति एवं सौहार्द की भावना मजबूत हो।’’ राष्ट्रीय लोक अदालत इसी उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ’’प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार आनंदिता सिंह’’ ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा संचालित विभिन्न विधिक सेवा एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में ’’राष्ट्रीय लोक अदालत का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट स्थान है।’’ यह केवल लंबित मामलों के निस्तारण का मंच नहीं, बल्कि न्याय को सरल, सुलभ, त्वरित एवं जनसुलभ बनाने की दिशा में एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि ’’लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विवाद का समाधान जीत-हार की भावना से नहीं, बल्कि आपसी सहमति, संवाद और सौहार्द के आधार पर किया जाता है।’’ जब दो पक्ष अपने विवाद को आपसी समझ और सहमति से समाप्त करते हैं, तो इससे केवल एक मामले का निस्तारण नहीं होता, बल्कि आपसी कटुता समाप्त होकर ’’भाईचारे, विश्वास और सामाजिक सौहार्द की भावना मजबूत होती है।’’

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि ’’लोक अदालत में किसी एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार नहीं होती, बल्कि दोनों पक्षों की संतुष्टि ही वास्तविक सफलता होती है।’’ यही कारण है कि लोक अदालत के माध्यम से प्राप्त समाधान का सामाजिक महत्व भी अत्यंत व्यापक है।

उन्होंने आमजन से अपील की कि वे राष्ट्रीय लोक अदालत को केवल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा न समझें, बल्कि इसे ’’अपने विवादों को शांतिपूर्ण, सरल और सम्मानजनक तरीके से समाप्त करने के अवसर’’ के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोग अपने लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों को आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से निस्तारित कराने के लिए आगे आएँ और राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएँ।

उन्होंने कहा कि ’’“राष्ट्रीय लोक अदालत का वास्तविक उद्देश्य केवल मामलों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि विवादों का समाधान कर लोगों के बीच संबंधों को बेहतर बनाना, समाज में शांति एवं सौहार्द स्थापित करना और प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करना है।”’’

          अन्त में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए लाल बिहारी पासवान, मुख्य न्यायिक दण्डधिकारी, ने राष्ट्रीय लोक अदालत की प्रक्रिया में सभी की भूमिका एवं सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि आप लोगो के द्वारा कई स्तरों पर कई दिनों से लगातार किये जा रहे प्रयास का प्रतिफल है। उनके द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन में अबतक किये सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया।





 *राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक मामलों के निस्तारण में औरंगाबाद ने रचा नया कीर्तिमान, अर्ध शतक मामलों का निस्तारण* 


राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक एवं वैवाहिक मामलों के निस्तारण के क्षेत्र में औरंगाबाद जिले ने अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में 50 पारिवारिक विवादों का आपसी सुलह, समझौते एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इस उपलब्धि से न केवल लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण में जिले की प्रभावी कार्यप्रणाली सामने आई है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि संवाद, समझ और आपसी सहमति के माध्यम से पारिवारिक विवादों का शांतिपूर्ण एवं स्थायी समाधान संभव है। इस दौरान कई ऐसे परिवारों को राहत मिली, जो लंबे समय से विवाद एवं मुकदमेबाजी के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। लोक अदालत के माध्यम से हुए समझौतों ने टूटते रिश्तों को जोड़ने, आपसी कटुता को समाप्त करने तथा परिवारों में पुनः विश्वास एवं सौहार्द स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया।

यह उपलब्धि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, न्यायिक पदाधिकारियों,अधिवक्ताओं, मध्यस्थों एवं सभी संबंधित पक्षों के सामूहिक प्रयासों और सार्थक सहयोग का परिणाम है। यह नया कीर्तिमान इस बात का प्रमाण है कि लोक अदालत केवल विवादों का निस्तारण करने का मंच नहीं, बल्कि परिवार और समाज में शांति एवं सौहार्द स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है। 

 *एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना के तहत सैकड़ो लोगो को मिला लाभ* 

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में औरंगाबाद में यातायात चालान निपटान योजना के तहत विशेष कैंप की व्यवस्था की गयी थी जिसमें कई बेंच द्वारा यातायात चालान से सम्बन्धित मामलों का निस्तारण किया गया। बिहार सरकार ने वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना, 2026 के तहत लम्बे समय से लम्बित ट्रेफिक ई-चालानों का त्वरित निपटारा किया गया। इस योजना  का मुख्य उद्देश्य अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करना है। यह उन चालानों पर लागू है जो 90 दिनों से अधिक समय से लम्बित है इस एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना, 2026 के तहत कुल 685 वादों को निस्तारित कराते हुए पक्षकारों को लाभ प्रदान करते हुए कुल 11 लाख 52 हजार 4 सौ 22 रु की वसुली की गयी। 

          

*चिकित्सा शिविर एवं विशेष जाँच शिविर का भी आयोजन*

     


सचिव द्वारा बताया गया कि आज आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सुगर, बीपी,  हिमोग्लोबीन की जाँच एवं दवाईओं के वितरण हेतु चिकित्सा जाँच शिविर का भी आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित कई वादकारियों के साथ-साथ न्यायालय कर्मियों, अधिवक्तओं का भी जाँच किया गया एवं आवश्याकतानुसार दवा का वितरण किया गया।

 *राष्ट्रीय लोक अदालत में 2594 वादों का निष्पादन के साथ कुल लगभग 3 करोड़ रूपये का समझौता कराया गया* |   

      


राष्ट्रीय लोक अदालत में आज मोटर दुर्घटना से सम्बन्धित वादों में कुल 2 वाद में 5.25 लाख  रूपये का समझौता कराया गया, परिवारिक मामले 50,आपराधिक सुलहनीय मामलें से सम्बन्धित 532 वाद, चेक बाउंस का 11 मामले में 50 लाख का समझौता हुआ। इसके साथ साथ अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय से सबन्धित 695 वाद, टेलीफोन 19 में 6 हजार 7 सौ एक रुपया समझौता हुआ तथा बैंक ऋण से सम्बन्धित 600 मामलें का निस्तारण करते हुए कुल 2 करोड़ 35 लाख 96 हजार 56 रूपये पक्षकारो को राहत दिया गया, इसके साथ साथ ट्राफिक से सम्बंधित 685  मामले में 11 लाख 52 हजार 4 सौ 22 रु का समझौता हुआ इस तरह कुल 2594 मामलों का निस्तारण करते हुए कुल लगभग 3 करोड़ रूपये का समझौता कराया गया| 


इस पुरे राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन को सफल बनाने में प्राधिकार के उप प्रमुख विधिक रक्षा परामर्श प्रणाली अभिनन्दन कुमार, सहायक विधिक रक्षा प्रणाली अधिवक्ता चन्दन कुमार मिश्रा, कर्मी सुनील कुमार सिंह, परशुराम कुमार सिंह, संजय कुमार, टेक्निकल,अर्पणा सहाय, सुनील कुमार सिन्हा, मो अनजारुल हक़, और सहयोगी नवरतन कुमार, बिरजा प्रजापत, , गीता कुमारी, कुंदन कुमार, राजीव नयन कुमार, मनोज कुमार, सहित सभी अर्धविधिक स्वयं सेवकों की भूमिका भी सराहनीय रही|

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