झारखंड गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।
एटीएच न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड क्षेत्र में पिछले दो-तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लगातार बारिश के चलते पंडी नदी उफान पर आ गई है। नदी का पानी आसपास के गांवों और खेतों में फैल जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्राम भीलमा, कर्मा, सोनपुरा, बरवाडीह, बलियारी, चोका, चंद्रपुरा सहित कई गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से किसानों द्वारा सैकड़ों एकड़ में लगाई गई फसलें जलमग्न हो गई हैं।
बाढ़ के पानी से खेतों में लगी तिल, अरहर, मक्का और धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगह खेत पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। किसानों का कहना है कि इस वर्ष शुरुआत में पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण वे पहले से ही सुखाड़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे थे। किसी तरह कर्ज लेकर और मेहनत कर किसानों ने खेतों में फसल लगाई थी। लेकिन अब अचानक हुई मूसलाधार बारिश और नदी में आई बाढ़ ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
किसानों के अनुसार, बारिश की कमी के कारण फसल बचाना पहले ही चुनौती बना हुआ था। इसके बाद लगातार बारिश से नदी का जलस्तर बढ़ने लगा और देखते ही देखते बाढ़ का पानी खेतों में फैल गया। खेतों में कई दिनों तक पानी जमा रहने से तिल, अरहर, मक्का और धान की फसलों के सड़ने तथा बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। फसल बर्बाद होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय किसानों ने बताया कि खेती में बीज, खाद, जुताई और मजदूरी समेत काफी खर्च हो चुका है। अच्छी फसल की उम्मीद में किसान दिन-रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि एक ओर बारिश की कमी ने परेशान किया और दूसरी ओर अब अत्यधिक बारिश एवं बाढ़ ने फसल को बर्बाद कर दिया है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है।
मिट्टी का कच्चा मकान ध्वस्त....
लगातार हो रही बारिश का असर आवासीय घरों पर भी देखने को मिला है। ग्राम भीलमा निवासी रीशेश्वर पांडेय का मिट्टी एवं खपरैल से बना मकान लगातार बारिश के कारण पूरी तरह ध्वस्त हो गया। मकान गिरने से परिवार के सामने रहने की समस्या उत्पन्न हो गई है। गनीमत रही कि मकान गिरने के दौरान किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण कई कच्चे मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में प्रशासन को प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर क्षति का आकलन कराना चाहिए, ताकि जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके।
मुआवजे की मांग....
बाढ़ से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों ने प्रशासन से खेतों में हुई क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते फसल क्षति का आकलन नहीं किया गया तो उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में अधिकारियों की टीम भेजकर फसल एवं मकान क्षति का जायजा लिया जाए तथा किसानों और प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
लगातार बारिश के कारण पड़ी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से ग्रामीणों में भी चिंता बनी हुई है। ग्रामीण नदी के आसपास के इलाकों में पानी की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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