संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH NEWS 11 GROUP :-गयाजी दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के 'स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस' (एसएलजी) द्वारा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के उपलक्ष्य में “पृथ्वी से परे अंतरिक्ष कानून की उभरती चुनौतियाँ और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शासन का भविष्य” विषय पर एक ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एसएलजी के प्रमुख एवं डीन प्रो. अशोक कुमार के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने वर्तमान समय में अंतरिक्ष कानून और उसके वैश्विक शासन के महत्व को रेखांकित किया। इसके बाद सहायक प्राध्यापक श्री मणि प्रताप ने वेबिनार के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अंतरिक्ष गतिविधियों में बढ़ती चुनौतियों और सुरक्षा पर चर्चा
वेबिनार के मुख्य वक्ता सास्त्रा डीम्ड यूनिवर्सिटी (तंजावुर) के सहायक प्राध्यापक श्री अखंड प्रताप राय थे। उन्होंने अंतरिक्ष कानून के कानूनी पहलुओं पर बात करते हुए कई ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। इनमें अंतरिक्ष का व्यावसायीकरण, निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी, अंतरिक्ष कचरा (Space Debris), सैन्यीकरण और संसाधनों के अनियंत्रित उपयोग जैसी चुनौतियाँ शामिल रहीं।
श्री राय ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब व्यापक शासन व्यवस्था (Space Governance) की ओर बढ़ रहा है। निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के बीच एक मजबूत और प्रभावी नियामक कानून की सख्त जरूरत है, जो नवाचार, राष्ट्रीय हित और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन साध सके। वैज्ञानिक प्रतिभाओं के पलायन पर जताई चिंता
वेबिनार के संवाद सत्र के दौरान सीयूएसबी के भौतिकी विभाग के प्रो. वेंकटेश सिंह ने इसरो से वैज्ञानिकों और तकनीकी प्रतिभाओं के निजी क्षेत्र में हो रहे स्थानांतरण पर चिंता व्यक्त की। इस पर विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि अंतरिक्ष में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश की बुनियादी वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम निदेशक एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. निहारिका सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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