नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा पत्र सार्वजनिक कर सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। 24 जुलाई को टाइप किया गया यह पत्र 25 जुलाई को सामने आया।
इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा है कि _"मुझे इस्तीफा देने से रोका गया था। मैं स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रहा हूं।"_ उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा _"आखिरकार देश के छात्र-छात्राओं नौजवानों की जीत हुई। तानाशाह क्रूर सरकार की हार हुई। लड़ेंगे जीतेंगे, लड़े हैं जीते हैं।"
पत्र में उन्होंने छात्रों और युवाओं के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा था। इस्तीफे के कारणों को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि नई शिक्षा नीति और परीक्षाओं को लेकर मतभेद के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
इस्तीफा सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने इसे सरकार की "तानाशाही" का सबूत बताया है। वहीं भाजपा ने अभी इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है.
*नोट:* अभी ये पत्र और बयान सोशल मीडिया पर "वायरल दावा" के रूप में चल रहा है। PMO या शिक्षा मंत्रालय से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे रिपोर्ट करते समय "कथित/वायरल" लिखना जरूरी है।

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