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कांडी का लाईफ लाइन चोंरांटी नदी में कचरा का अंबार जिम्मेदार कौन।

 झारखंड गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।




एटीएच न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड मुख्यालय का लाइफ लाइन मानें जाने वाला चोंरांटी नदी कांडी वासियों का कूड़ादान बन कर रह गया है। जिला मुख्यालय गढ़वा स्थित सरस्वती नदी के मिटती अस्तित्व को बचाने के लिए प्रशासन से लेकर ,मीडिया, राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर बड़ा अभियान चलाकर जागरूक किया गया और कई जेसीबी के द्वारा इसकी सफाई के लिए महीनों मशीन चले।कुछ इसी तरह की स्थिति कांडी के चोंरांटी नदी की हो गयी है।कांडी के लोग इस नदी को हीं कूड़ा फेंकने के लिए कूड़ादान के रूप में इस्तेमाल करते हैं।कांडी बाजार क्षेत्र के सभी तरह के दुकानदार हों या नदी के किनारे घर में निवास करने वाले लोग इसी नदी में समस्त कूड़ा कचरा डाल कर इस नदी के अस्तित्व को मिटाने पर उतर आए हैं।


इस घृणित कार्य पर रोक लगाने वाला कोई नही है।इस नदी में सभी तरह के कुड्डा कचरा डाला जाता है।लोहा ,शीशा सहित सभी तरह के कचरा के लिए यह नदी कूड़ादान बन कर रह गया है।बरसात के मौसम में उक्त कचरे का एक बड़ा भाग  पानी के साथ बह कर नदी के अंतिम छोर पर बसे सड़की के किसानों के खेतों में चला जाता है। लोहा ,शीशा ,सिरिंज  मेडिकल अवशिष्ट सहित अन्य कचरा खेतों में भर जाता है जिससे किसानों को खेती करने में काफी असुविधा होती है । उक्त नदी का बड़े पैमाने पर अतिक्रमण भी लगातार जारी है। नदी किनारे बसे लोगों ने इस नदी के सरकारी जमीन को अपना मानकर घर मकान बना लिए हैं तथा नदी के जमीन का इस्तेमाल अपने कार्य के लिए किया जा रहा है।जिस पर जॉच कर अंकुश लगाना जरूरी है।स्थानीय व जिला प्रशासन इस गम्भीर मुद्दे पर जब तक गम्भीर नही होगी इस नदी का अस्तित्व को नही बचाया जा सकता।साथ हीं स्थानीय लोगों को भी इस नदी के प्रति गम्भीर और जागरूक होना होगा।अगर ऐसा नही होता है तो इस नदी का अस्तित्व सदा के लिए लुप्त हो जाएगा।

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