ATH NEWS 11 GROUP OF MEDIA :-"कलम के सिपाही" कहे जाने वाले पत्रकारों पर हमले और खबर कवर करने से रोक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस मुद्दे पर ATH न्यूज़ 11 के प्रधान संपादक डॉ अमित श्रीवास्तव ने एक तीखा बयान जारी कर पत्रकार जगत से एकजुट होने का आह्वान किया है।डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि आज देशभर में स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों में पत्रकारों को खबर कवर करने से रोका जा रहा है। उनसे परमिशन और ऑथराइजेशन लेटर मांगा जाता है। कई बार जानलेवा हमले भी हो रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों? डॉ श्रीवास्तव का आरोप है कि पत्रकार संगठनों की भरमार तो है, लेकिन धरातल पर वे शून्य हैं। एक-दो दिन आवाज उठाकर चुप हो जाते हैं।"जब एक पत्रकार पर हमला होता है तो दूसरा पत्रकार उसके खिलाफ ही लिखने लगता है। हम पराया बढ़कर काम करते हैं। जिस संस्था ने हमें दूध पिलाया, आफत आने पर उसी के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। 'फूट डालो राज करो' की नीति पत्रकारिता में भी घुस गई है।"प्रधान संपादक ने कहा कि सरकारी मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में भी उन्हीं लोगों का कब्जा है जो सड़क पर उतरकर खबर नहीं करते। असली ग्राउंड रिपोर्टर सुविधाओं से वंचित हैं।
उन्होंने सभी पत्रकारों से अपील की कि कोई संगठन बनाने या जुड़ने की जरूरत नहीं, बस दिमाग में एक बात बैठा लें - "हम सब पत्रकार भाई-भाई हैं"। अगर किसी पत्रकार पर आफत आए तो सब मिलकर सामना करें।
ATH न्यूज़ 11 के प्रधान संपादक डॉ अमित श्रीवास्तव ने पत्रकारों पर बढ़ते हमलों और खबर कवरेज में रोके जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि "जिस दिन पत्रकारिता जगत एकमत हो गई, उस दिन समाचार संकलन में कोई भी महकमा रोक लगाने पर सौ बार सोचेगा।"
डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि आज स्कूल, कॉलेज, अस्पतालों में पत्रकारों से खबर के लिए परमिशन मांगी जाती है। ऑथराइजेशन लेटर न होने पर रोका जाता है, जानलेवा हमले तक हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में पत्रकार संगठन सिर्फ नाम के हैं, धरातल पर शून्य हैं।
उन्होंने कहा, "एक पत्रकार पर हमला होता है तो दूसरा उसी के खिलाफ लिखता है। हम 'फूट डालो राज करो' की नीति का शिकार हो रहे हैं। सरकारी मान्यता भी उन्हीं को मिलती है जो ग्राउंड पर काम नहीं करते।"
डॉ श्रीवास्तव ने सभी पत्रकारों से एकजुटता की अपील करते हुए कहा कि किसी संगठन की जरूरत नहीं, बस "हम सब पत्रकार भाई-भाई हैं" का भाव रखना है। उन्होंने कहा कि अगर एकजुट नहीं हुए तो कैंडल मार्च तक ही सीमित रह जाएंगे और पीड़ित परिवार जिंदगी भर दुख झेलेगा।


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