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युवाओं को निशान सिंह की जीवनी पढ़ना आवश्यक -- उच्च शिक्षा मंत्री.



डेहरी, रोहतास।वर्तमान युवा पीढ़ी को निशान सिंह की जीवनी को पढ़ना चाहिए। क्योंकि निशांत सिंह की जीवनी ने देश की आजादी में जो अपनी शहादत दी है उसकी जानकारी सभी को होना चाहिए वह अपने स्टाफ से भी प्रयास करेंगे की सरकार के स्तर से निशांत सिंह की वीरगति दिवस को राजस्थान पर मनाया जाना चाहिए उक्त बातें रविवार को इंजीनियर और ललन सिंह स्पोर्टिंग क्लब में हुआ राणा सामाजिक कल्याण संस्थान द्वारा आयोजित शाहिद निशांत सिंह वीरगति दिवस के संबोधन में उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर ने कही उन्होंने कहा कि शहीदों को सम्मान देना समाज के लिए गर्व की बात होती है निशांत सिंह के वीरगति दिवस को भव्य तरीके से मनाने के लिए ऐसे सामाजिक संस्थान बधाई के पात्र हैं राज्य सरकार के स्तर पर इसके लिए उनके स्तर से जो भी सहयोग करना पड़ेगा वह तैयार हैं। उन्होंने 1857 के महानायक बाबू निशान सिंह को बलिदान को देशभक्त साहस और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद निशान सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन कर किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ राष्ट्रगान गाकर तथा सभी अतिथियों के द्वारा दीप प्रचलित कर किया गया। मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा कि शहीद निशांत सिंह का बलिदान शाहाबाद के अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक है। निशान सिंह उन महान सेनानियों में थे,जिन्होंने अंग्रेजी in हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फुका। उन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावन  कर दिया। डेहरी विधायक राजीव रंजन सिंह उर्फ़ सोनू सिंह ने कहा कि प्रत्येक समाज की रक्षा को लेकर बाबू निशांत सिंह ने हंसते-हंसते अपनी कुर्बानी दी, शहर में उनकी प्रतिमा झारखंडी मंदिर के प्रांगण में लगाई जाएगी। हमारा परिवार आगे बढ़े तभी हम देश का कल्याण कर सकते हैं। 

पूर्व सांसद सुशील सिंह ने कहा कि इनके जैसा वीर योद्धा नहीं होते और 1857 नहीं होता तो 1947 में देश आजाद नहीं होता। आज 178 वर्ष बाद हम आज जहां खड़े हैं वह इन्हीं महापुरुषों का देन है। इनकी शहादत सम्मान से मनाया जाना बहुत बड़ी बात है। इनके ख्याति जिला के अंदर ही नहीं पूरे देश में है। इतिहास सीखने के लिए होता है इनकी दीवानगी थी पूर्व मंत्री संतोष सिंह, विधान परिषद सदस्य निवेदिता सिंह, विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने कहा की ऐसे शाहिद की अपेक्षा किसी भी परिस्थिति में जायज नहीं है। आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम को और बड़े स्तर पर किया जाना चाहिए। उसमें हम जैसे प्रतिनिधियों को जितनी जरूरत होगी, सहयोग किया जाएगा। पुलिस मेंस एसोसिएशन के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह ने कहा कि शाहिद निशान सिंह की जीवनी यह बताती है, कि क्षत्रिय समाज ने देश के लिए अपनी बलिदान दी है। अपने समाज के लोगों को अब भी यह सोचना चाहिए। विशेष कर प्रतिनिधियों को समाज की रक्षा करने वाला क्षत्रिय समाज कैसे आगे बढ़े और सभी समाजों की रक्षा करने में उनकी अपनी भूमिका निभाने वाले क्षत्रिय समाज उपेक्षित महसूस कर रहा है। जिस पर सभी प्रतिनिधियों को ध्यान देने की आवश्यकता है, और आपसी एकजुटता जरूरी है। स्वर्ण समाज आयोग के सदस्य राजकुमार सिंह व पूर्व सांसद रामा सिंहनने कहा कि विद्यालय में निशान सिंह की जीवनी पढ़ाई जानी चाहिए, ताकि वर्तमान युवा पीढ़ी को भी उनके जीवनी से बहुत कुछ जानने और सीखने का मौका मिले।

पूर्व विधानसभा प्रत्याशी विनोद सिंह, राणा दीपू सहित अन्य अतिथियों ने भी वीर बाबू निशांत सिंह के व्यक्तित्व पर अपने-अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मारी है, उन्होंने युवाओं से शहीदों के आदर्श अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन निशान सिंह वीरगति दिवस समिति के अध्यक्ष पंकज सिंह तथा अध्यक्षता गोपाल सिंह ने की।   कार्यक्रम में नए लोगों के अलावे कुंवर राणा सामाजिक कल्याण संस्थान के अध्यक्ष अमित उर्फ गोपाल  सिंह, महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता सिंह, सचिव राजन राज, संरक्षक सीमल सिंह, युवा मोर्चा अध्यक्ष अंबुज सिंह, करणी सेना प्रदेश अध्यक्ष पप्पू सिंह, वरीय अधिवक्ता राम मूर्ति सिंह, सोनू सिंह, मीडिया प्रभारी कमलेश सिंह, मनजीत सिंह, रोहित सिंह, अमित सिंह, सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह, विशाल सिंह रवि सिंह, हनी सिंह सुमित अन्य स्थितियों ने सदस्यों ने अतिथियों को अंग वस्त्र व प्रतीक चिन्ह देखकर सम्मानित किया। इस अवसर पर निशान सिंह के परिवार से आए सभी सदस्यों को संस्थान द्वारा सम्मानित किया गया। निशान सिंह के परिवार से आए डॉ लखन लाल सिंह, राम आशीष सिंह, विनोद सिंह,श्याम लालि सिंह, गंगा विष्णु सिंह,विभूति नारायण सिंह, बलिस्टर सिंह, ओमप्रकाश, विपिन,जयप्रकाश, मनोज,अजय एवं लव सिंह ने कहा कि दानापुर रेजीमेंट के विद्रोह एवं 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बड्डी गांव सुर्खियों में आ गया, गांव में सैनिकों की आवाजाही बढ़ गई और वहीं से बाबू निशांत सिंह की वीरता की कहानी लोकप्रिय होती चली गई यह एक बलिष्ठ योद्धा जो बाबू कुंवर सिंह के अति प्रिय थे जो उनका सेनापति थे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर व अन्य प्रतिनिधियों को मांग पत्र सौंपा गया। जिसमें मुख्य रूप से सुअरा गांव से पटना बनने वाला एनएच 119 ए का नाम बाबू निशांत सिंह के नाम पर करने, बाबू निशांत सिंह का स्मारक बनाने, बाबू निशान सिंह मांद का टूरिज्म मंत्रालय द्वारा उत्थान करने, सासाराम कचहरी स्थित स्मारक को सही स्थान पर करने, 7 जून को उनके नाम पर बलिदान दिवस घोषित करने सहित अन्य मांगे थी।

फोटो -- निशांत सिंह वीरगति दिवस कार्यक्रम का उद्घाटन करते उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर, विधायक सोनू सिंह, त्रिविक्रम सिंह, एमएलसी निवेदिता सिंह संतोष सिंह व अन्य.

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