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सुखाड़ एवं बाढ़ पूर्व तैयारियों की मुख्य सचिव ने की समीक्षा, औरंगाबाद में पेयजल, कृषि एवं राहत संसाधनों की तैयारी संतोषजनक।




मिथिलेश कुमार पाण्डेय व्यूरो चीफ औरंगाबाद।



औरंगाबाद।आज दिनांक 13 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के साथ संभावित सुखाड़ एवं बाढ़ पूर्व तैयारियों की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में वर्षा की वर्तमान स्थिति, भू-जल स्तर, पेयजल उपलब्धता, चापाकलों की कार्यशीलता, जलापूर्ति व्यवस्था, कृषि गतिविधियों, राहत संसाधनों तथा संभावित प्राकृतिक आपदा से निपटने की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई।


औरंगाबाद जिला से जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.), अपर समाहर्ता (आपदा)  उपेंद्र पंडित, आपदा प्रभारी अंतर कुमारी, जिला कृषि पदाधिकारी  संदीप राज, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, औरंगाबाद सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।


बैठक के दौरान बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 12 जुलाई 2026 तक राज्य में सामान्य वर्षापात की तुलना में लगभग 46.5 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। औरंगाबाद जिला भी वर्षा की कमी वाले (Deficient Rainfall) जिलों में शामिल है। ऐसी स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा संभावित सुखाड़ एवं बाढ़ दोनों परिस्थितियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी सुनिश्चित की गई है।


समीक्षा के दौरान बताया गया कि औरंगाबाद जिले में कुल 12,986 चापाकल स्थापित हैं, जिनमें से 12,911 चापाकल पूर्णतः कार्यरत हैं। केवल 75 चापाकल मरम्मत योग्य हैं तथा जिले में एक भी चापाकल अमरम्मत योग्य (Defunct) नहीं है। दिनांक 01 अप्रैल 2026 से अब तक 1,940 चापाकलों की मरम्मत कर उन्हें पुनः चालू कराया गया है तथा 1,743 मरम्मत किए गए चापाकलों का फोटो एमआईएस पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।


संभावित पेयजल संकट से निपटने हेतु जिले में 06 जल टैंकर उपलब्ध एवं पूर्णतः कार्यशील हैं। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में इन टैंकरों के माध्यम से तत्काल पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त पशुधन के लिए 12 कैटल ट्रफ स्थापित किए गए हैं तथा सभी क्रियाशील हैं, जिससे संभावित सुखाड़ की स्थिति में पशुओं के लिए भी निर्बाध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित रहेगी।

भू-जल स्तर की समीक्षा में बताया गया कि 30 जून 2026 तक औरंगाबाद जिले का औसत भू-जल स्तर 31 फीट 6 इंच दर्ज किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की तुलना में जिले के भू-जल स्तर में 6 फीट 7 इंच का सकारात्मक सुधार हुआ है, जो जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा जल प्रबंधन के प्रभावी प्रयासों का परिणाम है।


कृषि तैयारियों की समीक्षा के क्रम में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि खरीफ मौसम में किसानों को समय पर कृषि संबंधी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा आकस्मिक फसल योजना (Contingency Crop Plan), वैकल्पिक बीज उपलब्धता, डीजल अनुदान, सिंचाई सुविधा तथा अन्य कृषि सहायता योजनाओं को आवश्यकता अनुसार क्रियान्वित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। किसानों को मौसम की स्थिति के अनुरूप वैकल्पिक फसलों की खेती एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने हेतु भी लगातार जागरूक किया जा रहा है।


मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि शेष मरम्मत योग्य चापाकलों को अविलंब चालू कराया जाए, सभी पेयजल स्रोतों की नियमित निगरानी की जाए, जल टैंकरों एवं राहत संसाधनों को पूर्णतः क्रियाशील रखा जाए तथा सुखाड़ अथवा बाढ़ जैसी किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें। 

उन्होंने कृषि विभाग को किसानों के बीच वैकल्पिक फसल योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा सिंचाई संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया।


बैठक के उपरांत जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.) ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले के सभी चापाकलों को शत-प्रतिशत कार्यशील बनाए रखा जाए, पेयजल आपूर्ति की सतत निगरानी की जाए, जल टैंकरों एवं अन्य राहत संसाधनों को हर समय उपयोग के लिए तैयार रखा जाए तथा मुख्य सचिव द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।


जिला पदाधिकारी ने कहा कि औरंगाबाद जिला प्रशासन संभावित सुखाड़ एवं बाढ़ दोनों परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क एवं तैयार है। आमजन को पेयजल, राहत एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है तथा किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

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