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अधिवक्ता संघ ने दहेज मुक्त भारत बिषय पर एक संगोष्ठी आयोजित किया, जिसमें अध्यक्ष ने कहा दहेज एक दंडनीय अपराध है।

 




मिथिलेश कुमार पाण्डेय व्यूरो चीफ औरंगाबाद।





औरंगाबाद।आज दिनांक 04/07/2026 अधिवक्ता संघ औरंगाबाद में दहेज मुक्त भारत विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित किया, जिसकी अध्यक्षता अधिवक्ता संघ सचिव सिद्धेश्वर विधार्थी और संचालन जिला विधिज्ञ संघ औरंगाबाद के सहायक सचिव अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने किया।इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए अधिवक्ता संजय सिंह ने कहा कि दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के द्वारा दहेज एक दंडनीय अपराध है। इस समाजिक कुरीति को मिटाने का दायित्व देश के युवाओं पर है ।पारिवारिक वादों के बढ़ोतरी में दहेज एक मुख्य समस्या बनी है, अधिवक्ता सिद्धेश्वर विधार्थी ने कहा कि "दे दिया घर के दिया फिर भी कहते क्या दिया"बेटीया घर की लक्ष्मी होती है। लक्ष्मी रूपी बेटी को पिता वर पक्ष को देता है, उसके बावजुद वर पक्ष का यह सवाल आपने क्या दिया, जिससे दोनों पक्ष के सम्बन्ध बिगड़ जाते हैं। अतः सम्बन्ध मधुर बना रहे इसके लिए दुल्हन को ही दहेज मानें।कई मामलों में बेटी के पिता कर्ज लेकर या जमीन बेचकर भारी भरकम दहेज देते हैं। जिसे वर पक्ष दो दिन के शादी रस्मों में ही खर्च कर देते हैं, जो पेसे का दुरुप्रयोग है।

अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने कहा कि विवाह प्रकिया में परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारे संस्कृति में विवाह दो व्यक्तियों के मिलन ही नहीं दो परिवारों और उनके विचारों का मिलन है। दहेज मुक्त विवाह में लड़का पक्ष द्वारा दहेज न लेने का एहसान लड़की और उसके परिजनो को उम्र

भर रहता है। इससे प्रेम अपनापन, समर्पण और लगाव दीर्घकालिक होते हैं, जो लोग दहेज मुक्त विवाह करते हैं, वे समाज के प्रेरणा स्त्रोत है कि दहेज के बिना भी सुखमय और आनंदमय जीवन जी सकते हैं। दहेज मुक्त विवाह में दुल्हन की चरित्र, शैक्षणिक योग्यता, व्यवहार और कार्यकुशलता की प्राथमिकता मिलती है। इससे पति-पत्नी में समानता और शिष्टाचार की भावना पनप्ती हैं। दहेज मुक्त विवाह में घरेलू कलह, दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और पुनः दहेज मांग की सम्भावना कम रहती है । दोनों परिवारों के बीच किसी बात को लेकर खटास नहीं रहता और घर के बड़े बुजुर्ग का अनादर नहीं होता है।अधिवक्ता गिरीजेश नारायण सिंह ने कहा कि दहेज मुक्त विवाह दोनों परिवारों को कर्ज से बचाती है और मजबूत परिवारिक रिश्ता का जन्म देती है। लड़की व लड़की के माता-पिता तनावमुक्त होकर शादी का आनन्द लेते हैं।इस अवसर पर बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित थे

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