ATN NEWS 11:-(डॉ अमित श्रीवास्तव की कलम से )कानून से जुड़ी एक अहम खबर। हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वेश्यालय में रुपये देने वाले ग्राहक के खिलाफ अनैतिक व्यापार यानी Immoral Traffic Prevention Act के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 का उद्देश्य मानव तस्करी, देह व्यापार को बढ़ावा देने और उसका शोषण करने वालों पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत ग्राहक को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के प्रावधान मुख्य रूप से देह व्यापार का संचालन करने वालों, दलालों और शोषण में शामिल लोगों पर लागू होते हैं। केवल सेवा लेने वाले व्यक्ति को इस कानून के तहत दंडित नहीं किया जा सकता।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला कानून की व्याख्या को स्पष्ट करता है और भविष्य में ऐसे मामलों में पुलिस और निचली अदालतों के लिए मार्गदर्शक बनेगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कानूनी दायरे को लेकर बहस भी तेज हो गई है। फिलहाल कोर्ट ने कहा है कि कानून का मकसद शोषण रोकना है, न कि ग्राहक को सीधे दंडित करना।

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