संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH NEWS 11 GROUP :-बोधगयाजी मगध विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग एवं राष्ट्रीय कवि संगम के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को शिक्षा विभाग स्थित राधाकृष्णन सभागार में एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने की, जबकि कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम और राष्ट्रीय कवि संगम के प्रांतीय अध्यक्ष प्रभाकर कुमार राय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सुश्री चाँदनी एवं उनके समूह द्वारा प्रस्तुत 'वन्दे मातरम्' व कुलगीत से हुआ। विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र, पौधा और स्मृति-चिह्न भेंटकर किया।विद्यार्थियों और शिक्षकों की मौलिक प्रस्तुति.
प्रतियोगिता के माध्यम से चयनित विश्वविद्यालय के पाँच होनहार विद्यार्थियों— नौशाद (उर्दू विभाग), सुमित्रा कुमारी रजक व रीमा कुमारी (हिन्दी विभाग), शिप्रा कुमारी (अंग्रेजी विभाग) और अंकुश राज (शिक्षा विभाग) ने अपनी मौलिक रचनाओं का प्रभावी पाठ किया। इसके अतिरिक्त, हिन्दी विभाग के शिक्षकों डॉ. अम्बे कुमारी और डॉ. अनुज कुमार तरुण ने भी कविता पाठ किया। कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार मंगलम ने माँ पर आधारित एक मार्मिक कविता और सावन पर आधारित मगही गीत प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
आमंत्रित कवियों ने बांधा समां---
देश के विभिन्न हिस्सों से आए ख्यातिप्राप्त कवियों की रचनाओं ने सभागार में समां बांध दिया:
हाजीपुर की वर्षा ठाकुर ने समकालीन परिस्थितियों पर तंज कसते हुए पढ़ा: "हरे बाग भी इक दिन बंजर हो सकते हैं / कलयुग में मातम भी मंजर हो सकते हैं।"
गयाजी के कुमार आर्यन ने बुलंद आवाज में कहा: "तान छेड़ी है मुख़ालिफ़ जुल्म के / राग दरबारी कभी गाया नहीं।"हरिद्वार के दिव्यांश दुष्यंत ने जीवन-दर्शन का संदेश देते हुए सुनाया: "बुढ़ापा खरीदने खातिर जवानी मत बेच देना।"समस्तीपुर की शेफालिका झा ने अपनी रचना प्रस्तुत की "आज पुनः इस रस्ते से गुजरी तो पड़ी नज़र / वही पुराना एकमंजिला छोटा सा इक घर।"
उत्तर प्रदेश के शिव कुमार व्यास ने राष्ट्रभक्ति का आह्वान किया: "वीर बलिदानियों की जुबानी लिखो / विकसित भारत की अनुपम कहानी लिखो।"
दिल्ली के रसिक गुप्ता की पंक्तियों— "जन्म भारत में मिले, हम कवि बनें हर बार ही" पर पूरा सभागार तालियों से गूँज उठा।
साहित्य व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम कुलपति---
अपने संयोजकीय वक्तव्य में प्रभाकर कुमार राय ने बताया कि वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बिहार भर में 150 कवि सम्मेलन आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. दिलीप कुमार केशरी ने साहित्य को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया और जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कविता "हिमाद्रि तुंग श्रृंग से "की पंक्तियाँ सुनाईं।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन डॉ. परम प्रकाश राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुश्री सुशीला कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद कुमार चौधरी, गया कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सतीश सिंह चंद्र, जीबीएम कॉलेज की प्राचार्या प्रो. सीमा पटेल सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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