महराजगंज। एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर किसान कागजी प्रक्रियाओं और खाद संकट के दोहरे बोझ से जूझ रहा है। गांव-गांव से उठ रही आवाजें बताती हैं कि खेती से ज्यादा समय अब किसान सरकारी दफ्तरों और ऑनलाइन प्रक्रियाओं में लगा रहा है।
किसानों का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेना हो या खाद खरीदनी हो, सबसे पहले पंजीकरण कराओ, फिर ई-केवाईसी, उसके बाद एनपीसीआई लिंक कराओ, फार्मर रजिस्ट्री बनवाओ, दोबारा ई-केवाईसी कराओ, सत्यापन कराओ, आधार की त्रुटियां सुधरवाओ और कई मामलों में पैन कार्ड की औपचारिकता भी पूरी करो। सवाल यह है कि आखिर किसान खेती करे या कागजों की इस अंतहीन दौड़ में अपनी जिंदगी खपा दे?
सबसे बड़ा संकट खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता को लेकर है। किसान घंटों लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त यूरिया और डीएपी नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि एक बोरी यूरिया के सहारे पूरी खेती चलानी पड़ेगी तो उत्पादन कैसे बढ़ेगा और आय दोगुनी करने का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
जिले के किसानों का आरोप है कि शिकायतों के लिए ऑनलाइन पोर्टलों और कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होता। उनका कहना है कि शिकायतें दर्ज तो होती हैं, लेकिन निस्तारण की रफ्तार बेहद धीमी है। इससे किसानों में व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ रही है।
किसानों का यह भी कहना है कि विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन खेतों तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं पहुंचता। उनका आरोप है कि प्रचार-प्रसार पर अधिक जोर दिया जाता है, जबकि खाद, बीज, सिंचाई और योजनाओं की जमीनी चुनौतियां जस की तस बनी हुई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या किसान को हर योजना के लिए बार-बार अलग-अलग दस्तावेज और सत्यापन की प्रक्रिया से गुजरना जरूरी है? क्या सभी व्यवस्थाओं को एकीकृत कर किसानों को राहत नहीं दी जा सकती? और यदि किसान समय पर खाद, योजनाओं का लाभ और शिकायतों का समाधान नहीं पा रहा है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
अन्नदाता की मांग स्पष्ट है—सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, बार-बार होने वाली औपचारिकताओं पर रोक लगे, खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और शिकायतों का समयबद्ध समाधान हो। किसान का कहना है कि यदि खेती से अधिक समय कागजी कार्यवाही में ही निकल जाएगा, तो खेतों की हरियाली और देश की खाद्य सुरक्षा दोनों पर असर पड़ना तय है।
प्रभारी महराजगंज
कैलाश सिंह.

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