पत्रकारिता के सामने आने वाली चुनौतियों पर एक वरिष्ठ पत्रकार डॉ अमित श्रीवास्तव का बयान आज चर्चा में है। उन्होंने कश्मीर में रिपोर्टिंग के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक समय था जब "इंडियन मीडिया गो बैक" के नारे लगते थे।
पत्रकार ने कहा - _"एक दौर था जब कश्मीर में रिपोर्टिंग करने पर हम जैसे पत्रकारों को कहा जाता था - इंडियन मीडिया गो बैक। हमें धमकी दी जाती थी, हमारा माइक तोड़ दिया जाता था। उस समय हम लाचार होकर अपनी जगह बदल लेते थे, लेकिन काम करना नहीं छोड़ा।"_
उन्होंने साफ किया कि वो सभी की बात नहीं कर रही हैं। _"मुट्ठीभर कुछ लोग"_ थे।
*पत्रकार:* "आज भी एक वर्ग की मानसिकता वही है, लेकिन उनके शब्द बदल गए हैं। जाहिलों की उस तादाद से हम तब भी लड़े थे, जाहिलों की इस ताद से अब भी लड़ेंगे…"
पत्रकार के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई पत्रकारों ने उनके अनुभवों से सहमति जताई है और प्रेस की स्वतंत्रता पर बात की है।
आज पत्रकारिता पर हो रहे हमलों और बदलते स्वरूप को लेकर यह बयान एक बार फिर बहस का मुद्दा बन गया है।

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