संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH NEWS11 GROUP:-गयाजी दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय सीयूएसबी के यूजीसी मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र एमएमटीटीसी द्वारा 24 दिवसीय आवासीय 'गुरु दक्षता कार्यक्रम' फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम - एफआईपी का आयोजन किया गया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की मालवीय मिशन योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह ने "उच्च शिक्षा एवं उसका पारिस्थितिकी तंत्र" विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। मानव उत्कृष्टता की नींव है उच्च शिक्षा अपने व्याख्यान में प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता ही मानव उत्कृष्टता की गुणवत्ता को सुनिश्चित करती है। उन्होंने शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार को उच्च शिक्षा का तीन मुख्य स्तंभ बताते हुए कहा, "शिक्षण केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन और महान पेशा है। शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।" उन्होंने नए शिक्षकों से शैक्षणिक सत्यनिष्ठा और व्यावसायिक नैतिकता का पालन करने का आह्वान किया। इतिहास और ज्ञान परंपरा में शोधपरक दृष्टिकोण जरूरी कार्यक्रम के दूसरे सत्र में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. राजशरण शाही ने "कथ्य से तथ्य की ओर" विषय पर बात की। उन्होंने इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन में प्राथमिक स्रोतों और प्रमाणों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे इतिहास और संस्कृति को आलोचनात्मक और शोधपरक दृष्टिकोण से समझें।
कक्षाओं को समावेशी और संवेदनशील बनाना अनिवार्य
वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रजनी रंजन सिंह ने "भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में शिक्षार्थी एवं अधिगम प्रक्रिया की समझ" पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय कक्षाओं की भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता पर चर्चा करते हुए कहा कि हर बच्चा अपनी विशिष्ट पृष्ठभूमि के साथ आता है। इसलिए शिक्षण प्रक्रिया को समावेशी और समानतापूर्ण बनाना जरूरी है ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
बिहार-झारखंड के 42 शिक्षक ले रहे हैं हिस्सा विश्वविद्यालय के जन सम्पर्क पदाधिकारी पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस गरिमामयी कार्यक्रम का संचालन एमएमटीटीसी के निदेशक डॉ. तरुण कुमार त्यागी, डॉ. हेमंत कुमार सिंह (lकृषि विभाग, आतिश दाश अर्थशास्त्र विभाग और लेफ्टिनेंट डॉ. प्रज्ञा गुप्ता शिक्षक शिक्षा विभाग के समन्वित प्रयासों से किया जा रहा है। इस 24 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार और झारखंड के 10 अलग-अलग विश्वविद्यालयों से आए 42 नवनियुक्त शिक्षक भाग ले रहे हैं।

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