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महंगाई की नई चाल! कीमत वही, पैकेट छोटा; क्वालिटी में कटौती से उपभोक्ताओं की जेब पर दोहरी मार.




महराजगंज:-देश में लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम जनता एक नई समस्या से जूझ रही है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री, घरेलू उत्पाद और उपभोक्ता वस्तुओं में कई कंपनियां कीमत बढ़ाने के साथ-साथ क्वालिटी और मात्रा (क्वांटिटी) में भी कटौती कर रही हैं। इससे उपभोक्ताओं को एक ही उत्पाद के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि उन्हें कम सामान और अपेक्षाकृत निम्न गुणवत्ता मिल रही है।

बाजार में बिकने वाले बिस्कुट, नमकीन, साबुन, तेल, मसाले, शैंपू, डिटर्जेंट और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के पैकेटों का आकार लगातार छोटा होता जा रहा है। कई उत्पादों में पहले जहां 100 ग्राम सामग्री मिलती थी, अब वही पैकेट 80 या 90 ग्राम तक सीमित हो गया है। वहीं दूसरी ओर उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं।

उपभोक्ताओं का कहना है कि कंपनियां सीधे तौर पर कीमत बढ़ाने के बजाय पैकेट का वजन कम कर रही हैं, जिससे आम खरीदार आसानी से इस बदलाव को समझ नहीं पाता। विशेषज्ञ इसे “श्रिंकफ्लेशन” (Shrinkflation) का नाम देते हैं, जिसमें वस्तु की मात्रा घटाकर अप्रत्यक्ष रूप से कीमत बढ़ा दी जाती है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों का हवाला देकर कंपनियां अपने मुनाफे को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि उपभोक्ता संगठनों का आरोप है कि इस प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण और निगरानी की कमी के कारण आम जनता को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

लोगों का कहना है कि सरकार को बाजार में बिकने वाले उत्पादों की मात्रा और गुणवत्ता की नियमित जांच करानी चाहिए तथा उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सख्त नियम लागू करने चाहिए। बढ़ती महंगाई के इस दौर में जनता को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग भी तेज हो रही है।

आम उपभोक्ताओं का मानना है कि यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आने वाले दिनों में महंगाई का बोझ और अधिक बढ़ेगा तथा मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का घरेलू बजट गंभीर रूप से प्रभावित होगा।

      प्रभारी महराजगंज 

        कैलाश सिंह.

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