संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।
ATH NEWS 11 GROUP :-गयाजी दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ‘विज्ञान में महिलाएँ’ विषय पर एक प्रभावशाली राउंड टेबल चर्चा और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के संघर्ष, सफलता और उनकी ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालना था। आत्म-क्षमता और दृढ़ता पर जोर पैनल चर्चा में विश्वविद्यालय की तीन प्रख्यात महिला शिक्षाविदों ने अपने अनुभव साझा किए।
डॉ. दास अंबिका भारती (मनोवैज्ञानिक विज्ञान)उन्होंने कहा कि महिलाओं को बाहरी पहचान की प्रतीक्षा करने के बजाय अपनी आंतरिक क्षमता और सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
डॉ. अमृता श्रीवास्तव (जीव विज्ञान) उन्होंने अपने संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि कैसे 15 बार शोध पत्र अस्वीकृत होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने छात्रों को अपनी रुचि पहचानकर आगे बढ़ने की सलाह दी।
डॉ. मौनी रॉय (रसायन विज्ञान) उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई और इंदिरा गांधी जैसी शख्सियतों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे महिलाओं ने प्रणालीगत बदलाव लाए हैं।
चर्चा का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि पेशेवर, सामाजिक और पारिवारिक जीवन में 'पूर्ण संतुलन' एक मिथक है; सफलता केवल प्राथमिकताओं के सही चुनाव और सहयोगी वातावरण से ही संभव है।
‘सस्टेनओवेट 2026’ पोस्टर प्रतियोगिता के परिणाम:--
इस अवसर पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘सस्टेनओवेट 2026’ नामक पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
तन्वी सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया:--
द्वितीय स्थान:-सुशांत शेखर को उनके नवाचारपूर्ण दृष्टिकोण के लिए दूसरा स्थान मिला।
प्रतियोगिता में शंकर साहा और प्रिया प्रसाद ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
सराहना और प्रबंधन:-
आईआईसी के अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश सिंह ने कहा कि महिलाओं का वैज्ञानिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने कार्यक्रम की सफलता की जानकारी दी।

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