महराजगंज। जनपद का बेसिक शिक्षा विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। पहले से फर्जी नियुक्तियों और कार्यप्रणाली में गड़बड़ियों को लेकर सवालों से जूझ रहे विभाग पर अब गोपनीयता भंग करने के आरोप लगे हैं। ताजा मामला कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों से संवेदनशील कार्य कराए जाने का है, जिसने विभाग की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
5 से 10 हजार में ‘निजी स्टाफ’!
सूत्रों के मुताबिक, कार्यालय में तैनात कुछ वरिष्ठ बाबू अपने कार्य को आसान बनाने के लिए निजी तौर पर लोगों को 5 से 10 हजार रुपये मासिक पर रख रहे हैं। ये कथित निजी कर्मचारी कंप्यूटर संचालन से लेकर विभागीय फाइलों के संधारण और अधिकारियों के डोंगल तक का काम संभाल रहे हैं। सवाल यह है कि जब विभाग में अधिकृत कर्मचारी मौजूद हैं, तो बाहरी लोगों को कार्यालयीन और तकनीकी कार्य क्यों सौंपे जा रहे हैं?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि इन बाहरी व्यक्तियों को विभाग की संवेदनशील फाइलों और डिजिटल डेटा तक पहुंच दी जा रही है। शिक्षा विभाग से जुड़ी नियुक्तियां, सेवा अभिलेख, वेतन, पेंशन और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज अत्यंत गोपनीय श्रेणी में आते हैं। ऐसे में अनधिकृत व्यक्तियों की पहुंच डेटा सुरक्षा के लिहाज से बड़ा जोखिम मानी जा रही है।
कार्यालय के कई महत्वपूर्ण पटलों पर इन कथित निजी कर्मचारियों का दबदबा दिखाई देने की बात सामने आई है। आरोप है कि संबंधित बाबू केवल निगरानी की भूमिका निभाते हैं, जबकि वास्तविक कार्य उनके निजी कर्मचारी करते हैं। इससे विभागीय जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी बताई जा रही है कि अधिकारियों को इस व्यवस्था की जानकारी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे अंदरखाने मिलीभगत की आशंका बलवती हो रही है। यदि आरोप सही हैं तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक आचार संहिता के भी विपरीत है।
विभाग के कुछ बाबुओं पर पहले भी फर्जी नियुक्तियों और अन्य अनियमितताओं को लेकर जांच बैठ चुकी है, लेकिन अब तक किसी ठोस निष्कर्ष या दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई। लगातार कार्रवाई न होने से कर्मचारियों के मनोबल के बजाय मनमानी के हौसले बुलंद होने की चर्चा है।
इस पूरे प्रकरण पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पांडेय से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया। मोबाइल पर कई बार कॉल करने के बावजूद फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद जब टीम उनके कार्यालय पहुंची तो वे अनुपस्थित मिलीं।
जवाबदेही की मांग तेज---
शिक्षा व्यवस्था की बागडोर संभालने वाले विभाग में यदि इस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि आम जनता के विश्वास पर भी चोट है। अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चर्चा है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो विभाग की साख और गिर सकती है।
प्रभारी महराजगंज
कैलाशसिंह.

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