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समाधि गुफा पर्वत की सुरक्षा के लिए सेफ्टी वालों का भी हो जाएगा निर्माण ,आखिर कहां आइए जानते खबर विस्तार से

 गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।







एटीएच न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी  प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्रसिद्ध धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थल सतबहिनी झरना तीर्थ में छठ घाट सह सेफ्टी वॉल निर्माण को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रस्तावित योजना के तहत झरना घाटी के पश्चिम स्थित पुराने एवं सबसे बड़े छठ घाट के ठीक सामने नदी के पूरब किनारे नए छठ घाट का निर्माण कराया जाएगा। इसी को लेकर स्थल की मापी की गई। मापी के दौरान समिति के सदस्य, स्थानीय लोग तथा संबंधित कार्य से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

जानकारी के अनुसार, प्रतिवर्ष छठ महापर्व में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु और छठ व्रती पहुंचते हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त छठ घाट की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नए घाट के निर्माण से श्रद्धालुओं को पर्याप्त स्थान मिलेगा तथा सामूहिक रूप से छठ अनुष्ठान करने में काफी सुविधा होगी। इसके साथ ही नदी किनारे सेफ्टी वॉल का निर्माण भी कराया जाएगा, जिससे क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षा मिल सकेगी।

सतबहिनी झरना तीर्थ अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन रहस्यमयी संरचनाओं के कारण भी प्रसिद्ध है। यहां स्थित सात मंजिला साधना सह समाधि गुफा पर्वत लोगों के बीच आकर्षण और शोध का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पर्वत के नीचे कोई प्राचीन मंदिर या महल जैसी ऐतिहासिक संरचना छिपी हो सकती है। वर्षों पहले पुरातत्व विभाग के झारखंड प्रदेश के उपनिदेशक एवं वैज्ञानिकों की टीम ने भी इस स्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यहां मौजूद स्थापत्य शैली को पाल वंश कालीन बताया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, उस समय सीमेंट का आविष्कार नहीं हुआ था। प्राचीन काल में उड़द, बेल का गुदा, धुअन और गुड़ जैसे पारंपरिक पदार्थों को मिलाकर पत्थरों की जोड़ाई की जाती थी। सतबहिनी क्षेत्र में मौजूद गुफा पर्वत और अन्य संरचनाओं में भी उसी प्रकार की निर्माण शैली दिखाई देती है। यही कारण है कि यह स्थल ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुफा पर्वत के पश्चिमी किनारे पर मां सतबहिनी झरना तीर्थ एवं पर्यटन स्थल विकास समिति की ओर से सामुदायिक भवन सह कार्यालय का निर्माण कराया गया है। लेकिन नदी में बाढ़ आने के दौरान पश्चिमी हिस्से में लगातार मिट्टी कटाव की समस्या उत्पन्न हो रही है। इससे ऐतिहासिक गुफा पर्वत को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इसी खतरे को देखते हुए समिति के अध्यक्ष सह स्थानीय विधायक नरेश प्रसाद सिंह ने छठ घाट सह सेफ्टी वॉल निर्माण कराने का निर्णय लिया है।

हाल ही में आयोजित बैठक में विधायक ने घोषणा की थी कि इस योजना का निर्माण उनके निजी राशि से संचालित मिशन जनकल्याण के तहत कराया जाएगा। घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर स्थल की मापी शुरू करा दी गई, जिससे लोगों में खुशी का माहौल है।

विधायक ने बताया कि नदी की जलधारा के किनारे बड़े पैमाने पर बालू का भराव हो गया है। इसे हटाकर नीचे पीसीसी ढलाई के माध्यम से मजबूत प्लेटफार्म तैयार किया जाएगा, ताकि पानी का प्रवाह भी बना रहे और श्रद्धालुओं को सुविधा भी मिले। इसके ऊपर सीढ़ी नुमा छठ घाट का निर्माण कराया जाएगा, जिसकी ऊंचाई इतनी होगी कि सैकड़ों श्रद्धालु एक साथ सुरक्षित तरीके से पूजा-अर्चना कर सकें। उन्होंने कहा कि इस निर्माण से न केवल छठ व्रतियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि साधना सह समाधि गुफा पर्वत भी नदी कटाव से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष सह स्थानीय विधायक नरेश प्रसाद सिंह, सचिव पंडित मुरलीधर मिश्र, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष विभूति नारायण दुबे, गोरखनाथ सिंह, खुटहेरिया के पंचायत समिति सदस्य अभिनंदन शर्मा, रघुनंदन राम सहित कई लोग उपस्थित थे।

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