झारखंड गढ़वा ब्यूरो चीफ डॉ श्रवण कुमार की रिपोर्ट।
एटीएच न्यूज़ 11:- गढ़वा जिले के कांडी थाना क्षेत्र अंतर्गत खुटहेरिया पंचायत क्षेत्र के पखनाहा टोला में रामप्रवेश चौधरी के लगभग 35 वर्षीय पुत्र सह पलायन मजदूर सुदामा चौधरी के शव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार सुदामा चौधरी मई माह में खरसोता गांव निवासी स्वर्गीय हरि साह पुत्र ध्रुव प्रसाद में काम करने के लिए हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर 79 में दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करने गया था। लेकिन परिजनों को क्या मालूम की 2 माह बाद सुदामा चौधरी का मृत शरीर घर पहुंचेगा।
वहीं इस संबंध में जानकारी देते हुए काम पर रह रहे पड़ोसी व गांव के ही राकेश चौधरी ने बताया कि सुदामा चौधरी के रूम से महज 20 मीटर की दूरी पर हम भी रहते थे, और घटना की रात सुदामा चौधरी से मेरी बात भी हुई थी। लेकिन दूसरे दिन सुबह ड्यूटी नहीं आने पर रूम में देखा गया तो पाया कि रस्सी से फंदे के सहारे अपने बिस्तर पर सुदामा मृत अवस्था में बैठा हुआ है। जिसके बाद हमने अपने भाई सहित गांव के अन्य लोगों एवं घर के परिजनों को जानकारी दिया। इसके बाद कंपनी के लोग एवं ठेकेदार मौके पर पहुंचा और पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद हम सबों से दूर रह रहे अशर्फी चौधरी सोनू चौधरी अरविंद चौधरी और पुलिस सारी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम करा कर शव हम लोगों को सौंप दिया।
इधर ग्रामीणों एवं परिजनों का कहना है कि जिस हिसाब से मनोज चौधरी का शव अपने रूम में देखा गया, वह कहीं से नहीं लगता है कि सुदामा आत्महत्या किया हो। वहीं परिजनों ने बताया कि किसी न किसी के द्वारा सुदामा चौधरी का हत्या किया गया है, और फांसी लगाने का रूप दिया गया है। वहीं शव पहुंचने से पहले ही मृत सुदामा चौधरी पर का फोटो, वीडियो परिजनों को मिली जिसके बाद पर से ही हत्या का चर्चा आग की तरह फैल गई। वहीं शव पहुंचने से पहले परिजन कांडी थाना में भी शिकायत दर्ज कराने गए थे। वहीं इस संबंध में पूछे जाने पर थाना प्रभारी असफाक आलम ने बताया कि परिजनों को बताया हूं कि मामला गुरुग्राम का है लेकिन यहां से जो भी मदद चाहिए वह हम पूरा करेंगे।
इधर मृतक सुदामा चौधरी के पिता रामप्रवेश चौधरी भी हैदराबाद में मजदूरी का काम करते थे। उनके घर पहुंचने के बाद शव का अंतिम संस्कार खरसोता स्थित कोयल नदी घाट पर किया गया।
वही सुदामा चौधरी अपने पीछे पत्नी रीना देवी, दो पुत्र शिरोमणि,अंकित एवं पुत्री आकृति कुमारी को छोड़ गए। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था।

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