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मगध विश्वविद्यालय में 'विश्व स्वास्थ्य दिवस' पर विशेष आयोजन,युवाओं को सिखाए तनाव प्रबंधन के गुर।




संपादक डॉ मदन मोहन मिश्र की रिपोर्ट।



ATH NEWS 11 GROUP 11:-मगध विश्वविद्यालय ​बोधगया। विश्व स्वास्थ्य दिवस के पूर्व संध्या पर मगध विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा मन्नू लाल पुस्तकालय में युवाओं में तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता” विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माननीय कुलपति के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को मानसिक अवसाद से उबारना और उन्हें सकारात्मक जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना था।

​आंतरिक प्रेरणा और आत्म-नियंत्रण सफलता की कुंजी---

कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. बी.के. मंगलम ने दीप प्रज्वलन कर किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के दौर में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और मशीनीकरण युवाओं में मानसिक अवसाद का सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने जोर दिया कि बाहरी समस्याओं का समाधान मिल सकता है, लेकिन मानसिक तनाव का समाधान केवल आत्मचिंतन और सकारात्मक सोच से ही संभव है।

​सम्मानित हुए विश्वविद्यालय के गौरव इस अवसर पर विश्वविद्यालय का मान बढ़ाने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों—पूनम कुमारी, बुशरा परवीन, शीतल कुमारी और सौरभ कुमार को राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रतिनिधित्व के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही नवनियुक्त कुलानुशासक प्रो. कृष्ण देव प्रसाद वर्मा का भी अभिनंदन किया गया। प्रो. वर्मा ने बुद्ध के विचारों और विपासना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आसक्ति ही दुख का मूल है।

​विशेषज्ञों ने दिए तनाव मुक्ति के मंत्र---

BRABU मुजफ्फरपुर से आईं मुख्य अतिथि प्रो. सुनीता कुमारी ने 'इमोशनल इंटेलिजेंस' (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि 'Together for Health, Stand with Science' थीम के तहत युवाओं को चिंता और पहचान के संकट (Identity Crisis) से लड़ने के लिए सामुदायिक सेवा और योग को अपनाना चाहिए।

​स्नातकोत्तर भूगोल विभाग के अध्यक्ष प्रो. बसुदेव प्रसाद ने नींद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि रात्रि 10 से सुबह 4 बजे तक की नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं को नशे जैसी गलत आदतों से बचने की सलाह दी।

​व्यावहारिक सुझाव और अभ्यास---

कार्यक्रम में तनाव के विभिन्न प्रकारों (Acute, Chronic, Eustress, Distress) पर चर्चा की गई। डॉ. पिंटू कुमार, डॉ. रविंद्र सिंह, राजेश मिश्रा और डॉ. सुनील कुमार जैसे वक्ताओं ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपनाने और "स्वयं से पहले आप" के मोटो के साथ समाज सेवा करने की प्रेरणा दी। स्वयंसेवकों को एकाग्रता बढ़ाने के लिए 'दो मिनट का ध्यान' और ताली बजाने जैसी सरल क्रियाओं का अभ्यास भी कराया गया।

​कार्यक्रम का समापन विश्वविद्यालय कुलगीत और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और सैकड़ों स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

​तनाव के कारण: मोबाइल का दुरुपयोग, सामाजिक दबाव और मशीनीकरण।

​योग, ध्यान, पर्याप्त नींद (10 PM - 4 AM) और प्राकृतिक जीवनशैली।

आप अपने स्वामी स्वयं हैं अपनी ऊर्जा को पहचानें।

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