नई दिल्ली: देश के लाखों ग्रामीण चिकित्सकों के सम्मान, अधिकार और भविष्य की रक्षा के लिए आर्श हेल्थ इंडिया फाउंडेशन ने ऐलान किया है कि वह शीघ्र ही माननीय सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करेगी। यह कानूनी लड़ाई उन हजारों ग्रामीण चिकित्सकों के न्याय के लिए है, जिन्हें राज्य सरकारों द्वारा प्रशिक्षण एवं प्रमाणपत्र दिए जाने के बावजूद आज तक न तो कानूनी मान्यता मिली और न ही रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ।
फाउंडेशन का स्पष्ट कहना है कि जब राज्य सरकारें स्वयं ग्रामीण चिकित्सकों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणित करती हैं, तो उसके बाद उन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था से बाहर रखना अन्यायपूर्ण, भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है। ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सकों की अनदेखी न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य के साथ भी अन्याय है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें:-
राज्य सरकार से प्रशिक्षित एवं प्रमाणित ग्रामीण चिकित्सकों को कानूनी मान्यता (Legal Recognition) प्रदान की जाए।
प्रमाणपत्र प्राप्त ग्रामीण चिकित्सकों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में समायोजन/नियोजन (Regular Employment) दिया जाए।
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने हेतु प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सकों को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल किया जाए।
केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण चिकित्सकों के लिए स्पष्ट नीति, नियम एवं सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाए।
फाउंडेशन ने कहा कि यह केवल रोजगार की लड़ाई नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के स्वास्थ्य अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई है। यदि प्रशिक्षित एवं प्रमाणित ग्रामीण चिकित्सकों को उनका अधिकार नहीं मिला, तो यह आंदोलन कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से देशव्यापी रूप लेगा।
संस्था के चेयरमैन डॉ. आलोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में शीघ्र ही एक पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया जा रहा है, जो आगामी दिनों में इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट के लिए प्रस्थान करेगा।
आर्श हेल्थ इंडिया फाउंडेशन शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर न्याय की मांग करेगी।

Post a Comment